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अद्भुत, अलौकिक और दिव्य: पांडवों की नगरी में उतर आया देवलोक

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रविंद्र चौहान
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हस्तिनापुर। कार्तिक मास की पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि हस्तिनापुर का वैभव देखने से लग रहा था कि मानों स्वयं देवता धरा पर आ रहे हों। पतित पावनी मोक्षदायिनी मां गंगा के जगमगाते घाट और सांस्कृतिक छटा से गंगा की लहरों पर अर्पित दीपों की रोशनी में अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा था। इस नजारे को देखने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु गंगा किनारे पर मौजूद रहे। इन्होंने मां गंगा की पूजा-अर्चना कर मोक्ष की कामना की।
पांडवों की वैभवशाली राजधानी रही हस्तिनापुर में गंगा के तट से लेकर मंदिर, कुंड, तालाब और घरों में अद्भुत, अलौकिक और दिव्य देव दीपावली मनाई गई। कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की सुबह श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। वहीं, शाम के समय गंगा की लहरों पर ऐसा मनोरम दृश्य उतर आया मानों साक्षात देवलोक उतर आया। ऐसा भव्य नजारा हस्तिनापुर से लेकर गंगा घाट तक दिखाई दिया जहां श्रद्धालु आस्था और मोक्ष की कामना से पहुंच रहे थे। पैदल चले ठंड में रहे परंतु कृपा पाने के लिए पीछे नहीं हटे। दीपों की जगमगाती रोशनी, गीत-संगीत की धमक और आतिशबाजी की चमक, फूलों से सजे मंदिर, घाट, चटकीले रंगों से बनी मनोहारी रंगोलियां, घरों से लेकर गंगा के तट तक आस्था का अपार सैलाब और प्राचीन संस्कृति का यह नजारा आकर्षण का केंद्र रहा।
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दीपमाला व लड़ियों से सजाया
मखदूमपुर गंगा घाट, बूढ़ी गंगा घाट सहित द्रौपदी घाट, प्राचीन जयंती माता मंदिर, पांडेश्वर महादेव मंदिर, कर्ण मंदिर, प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, श्वेतांबर मंदिर, जंबूद्वीप तीर्थ आदि दर्जनों स्थानों पर भव्य रूप से दीपमाला और लड़ियों से सजाए गए थे।
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