उत्तर प्रदेश में मेरठ मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में डीप फ्रीजर खराब होने से शवों की दुर्गति हो रही है। शवों से उठने वाली दुर्गंध से पुलिस, मोर्चरी के कर्मचारी, डॉक्टर और मृतकों के परिजन परेशान हैं। वर्तमान में मोर्चरी के छह में से सिर्फ दो डीप फ्रीजर ही काम कर रहे हैं। कई बार शिकायत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
मेडिकल कॉलेज परिसर में गढ़ रोड पर मोर्चरी बनी है। यहां शवों को निर्धारित समय तक सुरक्षित रखने के लिए छह डीप फ्रीजर लगाए गए हैं। लेकिन चार फ्रीजर खराब होने से शवों को सुरक्षित नहीं रखा जा पा रहा है। ऐसे में शवों से उठने वाली दुर्गंध से पोस्टमार्टम रूम और मोर्चरी का बुरा हाल है। हालात यह है कि शव लेने आने वाले लोग मोर्चरी के अंदर जाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते हैं।
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वहीं अधिक गर्मी के कारण 10-12 घंटे में शव फूल जाते हैं और उनसे दुर्गंध उठने लगती है। ऐसे में वहां आने वाले लोगों का खड़े होना भी मुश्किल हो रहा है। कई बार तो लोग चक्कर खाकर गिर पड़ते हैं। पूर्व में कई महिला सिपाही भी यहां बेहोश होकर गिर चुकी हैं।
72 घंटे रखना होता है लावारिस शव
नियमानुसार, जिले में लावारिस मिलने वाले शव को पुलिस 72 घंटे तक मोर्चरी में सुरक्षित रखवाती है। जिससे उसकी शनाख्त कराई जा सके। इसके बाद ही डॉक्टर उसका पोस्टमार्टम करते हैं। लेकिन फ्रीजर खराब होने से शवों का बुरा हाल हो रहा है।
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