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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: नौकरशाही का शिकार हो गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, पढ़िए खास रिपोर्ट

Thu, 17 Sep 2020 07:00 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • नगर निगम 18745 पंजीकरण ही करा पाया
  • बैंकों को नहीं मालूम कितने आवेदकों को मिला लाभ
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दिनेश कुमार उपाध्याय और फुरकान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नौकरशाह इस कदर निरंकुश हो गए हैं कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से गरीबों और मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी बेरुखी साफ दिखती है। योजनाओं पर कोई काम नहीं हो रहा है, लेकिन अफसरों को इसकी कोई फिक्र नहीं है। यही नहीं, जनप्रतिनिधि भी इन योजनाओं में अपनी भूमिका नहीं निभा रहे हैं।

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लॉकडाउन के चलते बेरोजगार हुए रेहड़ी-पटरी वालों को फिर से खड़ा करने के लिए शुरू हुई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना कछुआ गति से चल रही है। शासन से मिले 65000 पंजीकरण के लक्ष्य के मुकाबले नगर निगम अब तक 18745 पंजीकरण ही करा पाया है। इनमें से भी 6815 आवेदन ऑनलाइन फीडिंग कर बैंकों को भेजे गए हैं।  एलडीएम ऑफिस से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल 5606 आवेदन प्राप्त हुए हैं। बैंकों ने भी 1036 आवेदकों की फाइल संस्तुति की है, लेकिन कितने लोगों को योजना के अंतर्गत पैसा मिल गया है, इसकी जानकारी बैंकों को नहीं है।

योजना में 29957 आवेदन आए हैं और निगम अधिकारियों का कहना है कि इनका सत्यापन कराया जा रहा है। नतीजा, योजना के लाभ के लिए 80 प्रतिशत रेहड़ी पटरी वाले डूडा, नगर निगम और बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। योजना शुरू होने के तीन माह बाद भी आवेदक इसके लाभ से वंचित हैं। शहर में ऐसे हजारों लोग हैं, जो रोज कमाकर परिवार का पेट भरते हैं। सड़कों पर ठेला लगाकर गुजर बसर करने वाले ऐसे तमाम गरीब लॉकडाउन खुलने के बाद भी बेरोजगारी से उबर नहीं पाए हैं। काम आधा रह गया है। लॉकडाउन में उधार लेकर गुजर- बसर करना पड़ा। ऐसे लोगों को अपने काम में आर्थिक मदद के लिए प्रधानमंत्री स्वानिधि योजना शुरू की गई। इसके तहत ठेले, खोमचे वाले अपना काम आगे बढ़ाने के लिए 10 हजार रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं। इस ऋण पर 24 फीसदी वार्षिक की दर से ब्याज देना होगा, जबकि ब्याज पर सात फीसदी की सब्सिडी सरकार देगी।
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कैंट बोर्ड में सूची बनी, फिर कुछ नहीं हुआ
कैंट क्षेत्र में ठेले-खोमचे-स्ट्रीट वेडरों की संख्या सात सौ के करीब है। लॉकडाउन के बाद इनमें से 25 फीसदी का काम बंद हो चुका है। यह इससे जाहिर है कि कैंट बोर्ड को रोजाना आने वाले राजस्व में लॉकडाउन के बाद से अब तक औसतन 25 फीसदी की कमी हुई है। कैंट क्षेत्र में योजना के क्रियान्वयन की कोई रीति-नीति नहीं है। बोर्ड के सदस्यों द्वारा ऐसे लोगों की सूची बनाने के बाद सीएबी के शिक्षकों की कमेटी बनाकर सर्वे कराया गया था, लेकिन इस सर्वे रिपोर्ट की जानकारी खुद सर्वे करने वालों को नहीं है।

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दो महीने पहले भरा था फार्म
किराए पर ठेला लेकर आइसक्रीम बेचने वाले मंशाराम झुग्गी बस्ती में रहते हैं। दो बच्चे हैं। वह दुकानों पर भी काम करते हैं। दो महीने पहले इस शख्स ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का फार्म भरवाया था। सोचा था कि अपना ठेला लेकर सामान बेचेंगे और लोन चुका देंगे, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।

लॉकडाउन में उधार लिया, हालात खराब
40 साल से औघड़नाथ मंदिर के पास प्रसाद और फूल बेचने वाले नंद किशोर का काम अनलॉक के बाद भी पहले जैसा नहीं चल रहा है। लॉकडाउन में उधार लेना पड़ गया। उम्मीद थी कि योजना में 10 हजार रुपये मिल जाएंगे तो उधार चुकाने के साथ ही काम में भी मदद मिलेगी। दो महीने पहले इस शख्स ने भी फार्म भरवाया था, लेकिन पता नहीं फिर क्या हुआ।

आवेदन किया था फिर पता नहीं चला
नगर निगम में कागजात फीड कराने पहुंचे किशनपुरा निवासी दिनेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि वह मलियाना पुल के पास फल की रेहडी लगाता है। नगर निगम कर्मियों ने 200 रुपये की रसीद काटकर आवेदन कराया था। 

मदद मिल जाएगी तो काम शुरू होगा
खत्ता रोड पर फलों के जूस का ठेला लगाने वाले फुरकान ने बताया कि अगर योजना से 10 हजार रुपये की मदद मिल जाएगी तो फिर से काम शुरू होने में मदद मिलेगी।

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