काउंसिलिंग के बाद भी संख्या कम
गार्गी गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल अनुपमा सक्सेना बताती हैं कि कला विषय में जल्दी सीटें भरती हैं, जबकि विज्ञान, गणित में प्रवेश कम होते हैं। कई बार जो लड़कियां दसवीं तक इन विषयों में अच्छे अंक लाती हैं उनके मम्मी-पापा को समझाते हैं कि बच्ची को साइंस दिलाएं, लेकिन वे नहीं समझते।
स्कूल में मेरे साथ की कई लड़कियां साइंस पढ़ना चाहती थीं, लेकिन उनके मम्मी-पापा विज्ञान पढ़ने से रोकते थे। उनका मानना था कि विज्ञान पढ़ना लड़कियों के लिए अच्छा नहीं है।
- खिरद जेहरा जैदी, छात्रा
साइंस में लड़कियां कम आती हैं। अब भी मेरे कॉलेज में साइंस से ज्यादा छात्राएं आर्ट्स में हैं। कई बार मैडम लड़कियों के मम्मी-पापा को समझाती हैं कि विज्ञान पढ़ाएं, लेकिन वो कहते हैं इसे पढ़कर नौकरी नहीं मिलेगी।
- सिमरन कर्दम, छात्रा
बढ़ाने होंगे महिला रोजगार के अवसर
यूनेस्को के 2014 से 2016 के आंकड़ों के अनुसार 30 प्रतिशत छात्राएं उच्च शिक्षा एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में आती हैं। सूचना प्रौद्योगिकी में महिलाओं का प्रवेश तीन फीसदी है। प्राकृतिक विज्ञान, गणित और सांख्यिकी में पांच फीसदी और इंजीनियरिंग और अप्लाइड साइंस में सिर्फ आठ प्रतिशत है। सरकार को महिला रोजगार की ओर ध्यान देना होगा।
- दीपक शर्मा, निदेशक, जिला विज्ञान क्लब
यह है इतिहास
इंटरनेशनल डे ऑफ वुमन एंड गर्ल इन साइंस 11 फरवरी को मनाते हैं। 22 दिसंबर 2015 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हर साल इस दिन को मनाना यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र महिला ने तय किया। ध्येय गणित व विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों को बढ़ावा देना है।
स्कूलों में साइंस की स्थिति
स्कूल छात्र छात्राएं
केएल स्कूल 282 134
ऑल सेंट्स स्कूल 30 20
सेंट जेवियर्स 17 9
आईआईएमटी एकेडमी 92 43
सेंट थॉमस इंग्लिश मीडियम 56 28
एमपीएस मेन विंग 233 20
बीडीएस इंटरनेशनल 143 68
सीजेडीएवी स्कूल 184 62
एमआईईटी 64 24
बालेराम ब्रजभूषण सरस्वती 260 88
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