अंतिम पत्र में लिखी लाइनें
अजीज कुलतार, तुम्हारी आंखों में आंसू देखकर दुख हुआ। हौसले से रहना, शिक्षा ग्रहण करना, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना और क्या कहूं। इसके बाद उन्होंने पत्र में चार शेर लिखे और अंत में लिखा... खुश रहो अहले वतन हम तो सफा करते हैं... तुम्हारा भाई भगत सिंह।
पत्र में लिखे शेर
उसे फिक्र है हरदम नया तर्जे जफा क्या है
हमें ये शौक है देखें सितम की इंतहा क्या है।
दहर से क्यों खफा रहें, चर्ख का क्यों गिला करें
सारा जहां अदू सही आओ मुकाबला करें।
कोई दम का महमा हूं अहले महफिल
चिराग ए शहर हूं बुझना चाहता हूं।
मेरी हवा में रहेगी ख्याल की बिजली
ये मुश्त ए खाक है फानी रहे ना रहे।
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