टेंडर पर 30 लाख खर्च, रिजल्ट शून्य
शताब्दी नगर स्थित अध्ययन स्कूल के पास मियावाकि विधि से छोटा जंगल बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई। इसके लिए टेंडर अपलोड किया गया। इसमें तीन नर्सरी ठेकेदारों ने भाग लिया। इसके बाद हरीश नर्सरी को तीन वर्ष के लिए 30 लाख रुपये खर्च कर टेेंडर फाइनल किया, लेकिन हालात उलट है। वहां मौजूद पौधे पेड़ बनने से पहले ही सूख गए हैं। शहर को छोटा जंगल का सपना दिखाने वाले एमडीए अधिकारी भी सरकार की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। एक बार फिर इसी स्थान पर पांच हजार पौधे लगाने की तैयारी है।
किस काम है उद्यान विभाग
एमडीए में उद्यान विभाग को पौधों की देख-रेख की जिम्मेदारी दी जाती है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को साइट की जिम्मेदारी रहती है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्हें ये सूखते और धरती पर गिरे पौधे नहीं दिखाई दिए।