गंगा यात्रा में सबसे अहम बात ये है कि इसमें ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा शामिल हो रहा है। पिछले चुनावों में भले ही भाजपा को मजबूत जीत हासिल हुई। लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अभी भी भाजपा की शहर के मुकाबले गांवों में पकड़ कमजोर है। हालांकि राष्ट्रोदय के बाद जिस तरह संघ की शाखाएं प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर फैलनी शुरू हुई हैं, उससे भाजपा को गांवों में भी संजीवनी मिली है। लेकिन सरकारी योजनाओं की जानकारी से अभी भी सुदूर क्षेत्र के गांव पीछे हैं। ऐसे में यह गंगा यात्रा गंगा किनारे के तमाम गांवों में कहीं न कहीं भगवा छाप जरूर छोड़ेगी।
यात्रा के दौरान संवर रहे कस्बे और गांव
गंगा यात्रा के जरिये भले ही गंगा को स्वच्छ बनाने का आह्वान किया जा रहा हो। लेकिन उससे पहले जहां-जहां से यह यात्रा गुजर रही है, वहां के दिन बहुर रहे हैं। गांवों की सड़कें दुरुस्त हो रही हैं। स्कूल, सरकारी भवन रंगाई पुताई के साथ सुंदर नजर आने लगे हैं।
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