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योजना का नहीं मिल रहा लाभ, सामने आया 6,040 लोगों का दर्द, पढ़िए खास रिपोर्ट

Thu, 07 Jan 2021 01:24 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
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टीबी की बीमारी
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बैंक खाता नंबर भी दिया और दवा भी खाई, परंतु मरीजों को निक्षय पोषण योजना का पैसा नहीं मिला है। यह दर्द मेरठ जिले में 6,040 लोगों का है, जिन्हें एक साल से योजना का लाभ नहीं मिला है। सवाल है कि इस तरह 2025 तक टीबी को हराकर देश कैसे जीत पाएगा।

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दरअसल, इस योजना के तहत हर माह प्रत्येक मरीज को 500 रुपये मिलने चाहिए। फिलहाल सरकारी अस्पतालों में 2,440 और निजी चिकित्सक से 3,600 मरीज इलाज करा रहे हैं। कोरोना काल के कारण दो माह से सभी 9,414 मरीजों का पैसा अटका है। 

चार हजार मरीजों ने कराया निजी चिकित्सकों से इलाज
जिले में साल 2020 में टीबी के 9,414 मरीज मिले, इनमें से 5,414 का इलाज सरकारी अस्पतालों में चला और चार हजार मरीजों ने निजी चिकित्सकों से इलाज कराया। इनमें से 4,900 लोगों के बैंक खाते की जानकारी जिला क्षय रोग विभाग की टीमों ने की। इनमें से 3,711 सरकारी और 400 निजी के खाते सही और चलते मिले। 
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इनमें से 3,374 लोगों तक ही योजना का पैसा पहुंचा, बाकी को भुगतान नहीं हुआ है। यह पैसा इन मरीजों के पोषण के लिए दिया जाता है ताकि टीबी से उबर सकें। 6,040 मरीजों को जो पैसा मिलना था, नहीं मिला है। यह रकम करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये है। 

दूसरे चरण में अब तक सिर्फ 19 मरीज मिले 
टीबी मरीजों की पहचान करने का पहला चरण खत्म हो चुका है। इसमें 3145 की जांच हुई। इनमें कोई मरीज नहीं मिला। दूसरे फेज में दो जनवरी से अब तक 154 लोगों की जांच हुई, जिसमें 19 मरीज मिल चुके हैं। यह चरण 12 जनवरी तक चलेगा। अभियान मलिन बस्तियों में चलाया जा रहा है, जबकि पहला अनाथालय, नारी निकेतन, जिला कारागार, वृद्ध आश्रम, मदरसा और रैन बसेरों में चलाया गया।

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35 मेडिकल स्टोर दे रहे मरीजों की जानकारी 
जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए मेडिकल स्टोरों को दवा लेने वाले मरीजों का ब्योरा हर माह जिला क्षय रोग कार्यालय पर देने के निर्देश हैं। हालांकि जानकारी महज 35 मेडिकल स्टोर संचालक ही दे रहे हैं, जबकि करीब 1700 मेडिकल स्टोरों को यह सूचना देनी चाहिए। 

ये रहीं मुख्य वजह
- मरीजों के पास बैंक खाता न होना 
- निजी चिकित्सकों से इलाज कराने वालों का सत्यापन न होना 
- कोरोना के कारण क्षय रोग विभाग के स्टाफ की ड्यूटी दूसरी जगह लगा देना
- भुगतान के लिए स्टाफ के डिजिटल सिग्नेचर जरूरी होने से परेशानी
- लोगों में निक्षय पोषण योजना को लेकर जागरूकता की कमी

कोरोना के कारण दिक्कत आई
काफी संख्या में मरीजों को योजना का लाभ नहीं मिला है। निजी चिकित्सक से इलाज कराने वालों का सत्यापन जीत संस्था कर रही है, इससे यह परेशानी दूर होगी। कोरोना के कारण भी दिक्कत आई है। कोशिश है सबका भुगतान हो। - डॉ. एमएस फौजदार, जिला क्षय रोग अधिकारी

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