जनहित में बनाए पार्किंग
तमाम दफ्तरों में काम से आने वाले लोग गाड़ियां कहां पार्क करें। बाहर पार्क करने पर पुलिस उठाकर ले जाती है। ये हाल शहर में कई जगह का है। शहर में पार्किंग के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। - उमाकांत अग्रवाल, सीए
मेयर-पार्षद को मिले तनख्वाह
मेयर किसी भी धर्म या पार्टी की सोच वाला न होकर स्थानीय होना चाहिए तभी वह समस्या को जान-समझकर उसका निराकरण करा सकेगा। मेयर, पार्षद भ्रष्टाचार में लिप्त न हों इसके लिए जरूरी है उन्हें तनख्वाह मिले। मेयर को न केवल अपने अधिकार पता हों, जिम्मेदारी का भी उसे ज्ञान हो। - अनुपम शर्मा, सीए
सरकारी योजनाओं की हो जानकारी
सरकार की ओर से तमाम योजनाएं जनता के लिए चलाई जाती हैं। ऐसे में मेयर व पार्षद को न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए बल्कि इनका लाभ दिलाने का भी काम करना चाहिए। मेडिकल में जंबो पैक की मशीन फीता काटने के बाद से बंद पड़ी है। यह चालू होनी चाहिए। स्वच्छता और पर्यावरण के लिए वे काम करें। - प्रभात गुप्ता, सीए
खरा न उतरने पर हो हटाने का अधिकार
प्रत्याशी केवल चुनावी वायदे करते हैं जो चुनाव के साथ खत्म हो जाते हैं। प्रत्याशी चुने जाने के बाद पांच साल तक सुरक्षित हो जाता है। कई तो नजर तक नहीं आते। ऐसे में जरूरी है कि जनता को उम्मीदों पर खरा न उतरने वाले प्रत्याशी को बीच में ही हटाने का अधिकार हो। एक-दूसरे पर समस्या न डालें, इसके लिए जिम्मेदारी तय हो। - केपी सिंह, सीए
प्रतिभा पलायन न हो, मेरठ में बढ़ें सुविधाएं
सियासी दलों के जातीय कार्ड खेलने के फेर में जनता को नहीं फंसना चाहिए। मेरठ को मजबूत प्रतिनिधित्व मिले और शहर का विकास हो, इस पर ध्यान देना चाहिए। दावेदार को पार्टी का चोला ओढ़कर नहीं बल्कि अपनी उपलब्धियां गिनानी चाहिए। मेरठ से बच्चे पढ़ने व कमाने के लिए बाहर न जाएं, इस पर जमीनी स्तर पर प्लानिंग के साथ काम हो।
- निमिषा रोहित अग्रवाल, एग्जीक्यूटिव मेंबर आईसीएआई मेरठ
अपना दायित्व समझकर निभाए जिम्मेदारी
चुनाव के दौरान ही वादों और दावों की झड़ी लगती है। जनता को चाहिए कि वह सियासी दल से ज्यादा प्रत्याशियों के काम को तरजीह दे। ड्रेनेज, सीवेज और पेयजल की शहर में बड़ी समस्या है। अपने बीच के व्यक्ति को ही पार्षद चुनें, जो समस्याओं का निराकरण करा सके। मेयर भी मजबूत पकड़ के साथ विकास कराने वाला हो।
- आशीष अनेजा, सचिव आईसीएआई मेरठ
दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ करे विकास
मेयर का पद शहर के प्रथम नागरिक का गरिमामयी पद है। ऐसे में मेयर पढ़ा-लिखा होने के साथ ही दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ काम करने वाला होना चाहिए। रैपिड ट्रेन का काम तेजी से चल रहा है, हाइवे बन रहे हैं, आने वाले दिनों में यातायात को लेकर मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। मेयर को वार्ड की समस्याओं की जानकारी हो और बजट बनाकर काम कराए।
- चिराग गुप्ता, अध्यक्ष मेरठ आर्किटेक्ट एसोसिएशन
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर बने प्लान
शहर में बहुत असमानताएं हैं, जो दूर होनी चाहिए। रूड़की रोड पर कृषि भूमि पर प्लॉटिंग कर 80 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर तक में कॉलोनी काटी जा रही है। वहीं शहर के अन्य भागों में बहुत कम सर्किल रेट है। यह असमानता दूर होनी चाहिए। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर ठोस प्लानिंग के तहत काम की सख्त जरूरत है। फाइनेंशियल कैलेंडर बनाकर काम हो।
- देवेंद्र मोहन, आर्किटेक्ट
90 फीसदी लोगों का 10 फीसदी करे अपना काम
मौजूदा समय में जो भी मेयर बनता है वह 90 फीसदी काम तो अपना ही करता है, जबकि दस फीसदी ही लोगों के काम वह कराता है। वास्तव में मेयर ऐसा चाहिए जो 90 फीसदी लोगों का और दस फीसदी अपने काम करे। जरा देर की बारिश में भारी जलभराव हो जाता, नाले उफनने लगते हैं। अतिक्रमण इसकी बड़ी वजह है। इस पर सख्त नीति के साथ काम हो।
- राकेश जैन, अजंता कॉलोनाइजर्स
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जमीनी स्तर पर कराए शहर का विकास
मेरठ में कई विकास योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में अपार संभावनाओं का शहर मेरठ बन गया है। मेयर ऐसा हो जो हवाई नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर काम करे। शहर में 250 करोड़ की विकास योजनाओं का खाका खींचा गया, जो कागजों में ही दम तोड़ गया। आबूनाले को पाटकर पार्किंग और व्यवसायिक उपयोग का मसौदा 1984 में बना जो आज तक अटका है।
- जागेश कुमार, अध्यक्ष यूपी आर्किटेक्ट एसोसिएशन