पश्चिमी उत्तर प्रदेश को शुगर बाउल क्षेत्र कहा जाता है। यहां 70 प्रतिशत से अधिक किसान गन्ने की खेती करते हैं, लेकिन विकास की रफ्तार ने गन्ने की फसल के रकबे को ही घटा दिया है। मेरठ परिक्षेत्र में एक्सप्रेसवे के निर्माणों के चलते इस्तेमाल हुई खेती की जमीन के चलते पिछले सत्र के मुकाबले इस सत्र में 1139 हेक्टेयर गन्ने की फसल कम हुई है। हापुड़ और बागपत क्षेत्र में कार्यों के चलते अधिक प्रभाव पड़ा है।
मेरठ परिक्षेत्र में मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा क्षेत्र आता है। इन सभी जिलों को मिलाकर वर्ष 2023-24 सत्र के गन्ना सर्वे में 3,85,163 हेक्टेयर में गन्ने की फसल हुई है जो कि पिछले सत्र 2022-23 के मुकाबले 1139 हेक्टेयर कम है। पिछले सत्र में 3,86,302 हेक्टेयर में गन्ने की फसल हुई थी। इममें पिछले सत्र में 2,02,019 पेड़ी, 1,84,283 पौधे थे। इस सत्र में पेड़ी घटकर 1,92,660 रह गई है और पौधा बढ़कर 1,92,503 हो गया है। परिक्षेत्र के हापुड़ और बागपत में एक्सप्रेसवे के कार्य के चलते गन्ने के रकबे में अधिक कमी आई है। पिछले सत्र में हापुड़ में जहां पौधे और पेड़ी को मिलाकर 41,947 हेक्टेयर गन्ना हुआ था वहीं इस वर्ष यह घटकर 38,346 रह गया है। बागपत में पिछले सत्र में पेड़ी और पौधा जहां 85,491 हेक्टेयर में था वह इस सत्र में घटकर 84,181 हेक्टेयर रह गया है।