इन्होंने किया प्रतिभाग
प्रतियोगिता में कुल 30 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें शिवानी सैनी, साक्षी सिंघल, नियाज हुसैन, मो. असमार, मो. शादाब, सृष्टि गुप्ता, मो. मुजम्मिल, सलोनी गुप्ता, चांदनी, शीतल सैनी, काजल शाक्य, अक्षिता शर्मा, मांगेराम, प्राची, रेनु, आकांक्षा दोहरे, ज्योति, सपना, आंचल, अंकित कुमार, फरहीन, दीक्षा, मुमताज खान, आदित्य, रिचा शर्मा, नंदिनी धीमान, शाश्वत वत्स, राघव कौशिक, जितेंद्र कुमार और दीशु देवी शामिल रहीं।
विजेताओं की बात
-- प्रतियोगिता में सबसे अधिक 72 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल कर पांच हजार रुपये का इनाम पाने वाले जेवी जैन कॉलेज के एमए इतिहास के छात्र शाश्वत वत्स ने अमर उजाला को धन्यवाद किया। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराते हैं, जिनमें उन्हें अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलता है।
-- 67 अंकों के साथ दूसरा स्थान पर रही राजकीय महाविद्यालय देवबंद की छात्रा प्राची को तीन हजार रुपये का चेक मिला। इनाम पाकर प्राची खुश नजर आई। उन्होंने भी आयोजन की सराहना की और अमर उजाला को धन्यवाद किया।
-- जेवी जैन कॉलेज की छात्रा दीशु देवी को 66 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल दो हजार रुपये का चेक मिला और प्रमाण पत्र प्रदान किया। दीशु का कहना था कि ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए। प्रतिभाग करने से समझ बढ़ती है और छात्रों के मन से संकोच दूर होता है।
-- 65 अंकों के साथ सांत्वना पुरस्कार पाने वाले रामदूत कॉलेज ऑफ एजूकेशन रणदेवी नकुड़ के छात्र मो. असमार को एक हजार रुपये का चेक और प्रमाण पत्र मिला। उनका कहना है कि प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी बात रखने का मौका मिला, अतिथियों की बातें सुनकर सीख भी मिली।
-- 65 अंकों के साथ सांत्वना पुरस्कार पाने वाली मुन्नालाल जयनारायण खेमका गर्ल्स कॉलेज की छात्रा साक्षी सिंघल को एक हजार रुपये का चेक और प्रमाण पत्र मिला। साक्षी ने कहा कि अपने विचारों को मंच पर रखने का मौका मिला और इनाम पाकर बेहद खुशी हुई।
प्राची और फरहीन ने गाई सरस्वती वंदना
प्रतियोगिता के शुभारंभ में राजकीय महाविद्यालय देवबंद से आई छात्रा प्राची और फरहीन ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सुंदर आवाज के साथ जब उन्होंने सरस्वती वंदना सुनाई तो कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर से उनका उत्साहवर्धन किया।
अतिथियों की बात
- अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से वाद-विवाद प्रतियोगिता कराया जाना अच्छा प्रयास है। प्रतिभागियों को सुनकर मुझे भविष्य के कई नेता, कई आईएएस और कई वैज्ञानिक नजर आए हैं। युवाओं को चाहिए कि वह अपना लक्ष्य निर्धारित कर उसको हासिल करने में जुट जाएं। आज के कार्यों को कल पर नहीं छोड़ें। खास बात लक्ष्य हमेशा बड़ा रखें। - डॉक्टर पंकज कुमार वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट।
- अमर उजाला परिवार ने वाद-विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक रहकर मुझे अच्छा लगा। अच्छा लगने की वजह यह है कि मुझे आज के युवाओं की सोच और उनके ज्ञान के स्तर का आंकलन करना था। वास्तव में सभी प्रतिभागी एक से बढ़कर एक थे। युवाओं को चाहिए कि वह ऐसी प्रतियोगिताओं में जरूर प्रतिभाग करें। -- डॉक्टर पीके शर्मा, निर्णायक एवं पर्यावरणविद।
-- वाद विवाद प्रतियोगिता कराने का प्रयास सराहनीय है। निश्चित ही ऐसे आयोजनों में प्रतिभाग कर विद्यार्थियों की समझ बढ़ती है और जब समझ बढ़ने के साथ इनाम भी मिलें तो और मजा आता है। जिन्हें पुरस्कार मिला उन्हें बधाई। जिन्हें नहीं मिला उन्हें भी बधाई, क्योंकि हार जीत अपनी जगह है, मगर मंच पर आकर बोलना हर किसी के बस की बात नहीं। -- डॉक्टर एके डिमरी, निर्णायक एवं प्राचार्य महाराज सिंह कॉलेज।
-- प्रतियोगिता का हिस्सा बनकर मुझे अच्छा लगा है। प्रतियोगिता को लेकर प्रतिभागियों का उत्साह साफ नजर आ रहा था। ज्यादातर ने तर्कसंगत और विषय से जुड़कर अपनी बात को रखा। ऐसे में हमें निर्णय देने में मुश्किल हुई। ऐसे आयोजन भविष्य में भी होने चाहिए। -- डॉक्टर हरिओम गुप्ता, निर्णायक।
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