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एक्सक्लूसिव: सरकारी जमीन पर अवैध खनन, स्टेडियम की तैयारी में भू-माफिया, ऐसे हुआ बड़ा खेल

Mon, 28 Sep 2020 11:42 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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डीएम को मामले की जानकारी देते एडीएम - फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ मेरठ जिले में जमीन न मिलने से उद्योग और अन्य विकास कार्यों में रुकावट आ रही है, वहीं नौकरशाह खुद ही सरकारी जमीन की बंदरबांट कर रहे हैं। जमीन उपलब्ध न होने का बहाना बनाने वाले जिला प्रशासन के अधिकारियों की करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन भू-माफिया से मुक्त कराने में दिलचस्पी नहीं है। सरकारी जमीन पर कब्जों के लिए नौकरशाहों और भू-माफिया की मिलीभगत सामने आ रही है। 

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ऐसा ही एक मामला परतापुर क्षेत्र के मोहकमपुर, सुंदरा उर्फ पुठा, मलियाना और कुंडा गांव स्थित सरकारी जमीन का है। करोड़ों रुपये की इन सरकारी जमीनों पर भू-माफिया काबिज है। दूसरी ओर यहां पर जसवंत शुगर मिल की ओर से अपनी जमीन होने का दावा किया जा रहा है। मामले में हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए मेरठ जिला और पुलिस प्रशासन को अधिकृत कर दिया है। 

निर्देश दिए थे कि सीलिंग अधिनियम का पालन करते हुए और स्थिति का आकलन कर जिला प्रशासन इस जमीन को अपने कब्जे में ले। यह जमीन करीब 18 हजार हेक्टेयर बताई जा रही है। मामले का अहम पहलू यह है कि एक लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इस जमीन पर भू-माफिया अवैध खनन करने के साथ ही, स्पोर्ट्स स्टेडियम भी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके तुरंत बाद लेखपाल का तबादला कर दिया गया। माना जा रहा है कि अगर यह जमीन जिला प्रशासन को मिल जाए तो जिले में विकास कार्यों को पंख लगाए जा सकते हैं। 
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तबादला होते ही डीएम का खेल 
भू-माफिया के प्रभाव में तबादला होते ही डीएम के निर्देश पर तहसीलदार और एडीएम सिटी प्रशासन से अलग-अलग और आनन-फानन में रिपोर्ट तैयार कराई गई। एक अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में अवैध कब्जे वाली सरकारी जमीन पर मकान निर्माण, प्लाट काटने-काटे जाने, खेती होने जैसी स्थितियों को स्पष्ट रूप में दर्शा दिया। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में अवैध कब्जे वाली सरकारी जमीन पर यथास्थिति रखे जाने की भी संस्तुति कर दी। वहीं, दूसरे प्रशासनिक अफसर ने रिपोर्ट दी कि अवैध कब्जा हटाने से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित और सरकारी संपत्ति की क्षति हो सकती है। यहां यथास्थिति बनी रहनी चाहिए। बस फिर क्या था, इस जमीन की पहले की तरह ही बंदरबांट हो गई।

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सत्ता पक्ष के नेता भी दे रहे शह
मेरठ के विकास के लिए जमीन की मांग पहले कई बार उठ चुकी है। बावजूद इसके जिला और पुलिस प्रशासन जमीन उपलब्ध कराने में आनाकानी करता रहता है। नौकरशाहों की नीयत में खोट इसका कारण बताया जा रहा है। परतापुर के मोहकमपुर, मलियाना, पुठा और कुंडा गांव में करोड़ों की सरकारी जमीन है। अवैध कब्जा करने वाले भू-माफिया पर शिकंजा कसने में भी नौकरशाही अड़ंगा डालती रही है। भू-माफिया की सेटिंग लखनऊ तक है और सत्ता पक्ष के कुछ नेता इन्हीं भू-माफिया के इशारे पर चलते हैं।

सीएम की हिदायत का कोई असर नहीं 
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वर्चुअल मीटिंग में एक जनप्रतिनिधि ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की बात उनके सामने रखी थी। जनप्रतिनिधि ने मांग उठाई कि सरकारी जमीन अवैध कब्जों से मुक्त हो। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को कार्रवाई की हिदायत दी, लेकिन जिला और पुलिस प्रशासन की नींद टूटते नहीं दिख रही है। 

सरकारी जमीन पर बिल्डर की भी नजर
बताया जा रहा है कि सरकारी जमीन पर एक बिल्डर की नजर है। इस बिल्डर ने कुछ भू-माफिया के साथ मिलकर यहां प्लाटिंग की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह सारा खेल जिला और पुलिस प्रशासन की सांठगांठ से हो रहा है। जानकारी के बावजूद सत्ताधारी दल के नेता खामोश हैं। दरअसल, वे जानते हैं कि कुछ बड़े नेताओं के इशारे पर ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं।

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