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एक्सक्लूसिव: सरकारी जमीनों पर व्यावसायिक निर्माण, सभी निर्माणों के पीछे हैं रसूखदार और सत्ता पक्ष से जुड़े लोग

Sat, 26 Sep 2020 11:42 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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जिला प्रशासनिक अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में नजूल की जमीन को लेकर सरकार की नीति का हश्र भी शमन नीति जैसा ही होने वाला है। दरअसल, नजूल की जमीन पर यदि आवासीय कब्जा है तो उसे शत-प्रतिशत सर्किल रेट की वसूली के साथ फ्री होल्ड करने की बात कही गई है, लेकिन मेरठ में अधिकांश निर्माण व्यावसायिक हैं।

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शासन अब अवैध निर्माण और कब्जे नियमित करने की नीति ला रहा है। पहले शमन नीति आई, जिसमें स्वीकृत मानचित्र के विपरीत आवास में निर्माण कराने वाले उसे नियमित कर सकते हैं। इसमें मामला अलग निकला, क्योंकि आवास एवं विकास परिषद व एमडीए में 10 प्रतिशत निर्माण ही ऐसे हैं, जो आवासीय नक्शे के विपरीत हैं। बाकी निर्माण व्यावसायिक हैं। इसलिए शमन के लिए पचास आवेदन भी नहीं आए हैं।

अब शासन ने सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर नीति जारी की है। इसमें जिन लोगों ने आवास बनाए हुए हैं और वह उनमें रह रहे हैं, वह शत-प्रतिशत सर्किल रेट जमा कर जमीन को फ्री होल्ड करा सकते हैं। इसमें व्यावसायिक निर्माण शामिल नहीं हैं। मेरठ में अगर देखें तो सरकारी जमीनों पर कब्जा कर अधिकांश निर्माण व्यावसायिक ही हुए हैं। ये निर्माण भी शहर के रसूखदारों ने किये हैं। इनका निस्तारण नामुमकिन नजर आ रहा है। 
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नजूल रजिस्टर नहीं किया अपडेट
जिला प्रशासन के रिकॉर्ड रूम में नजूल रजिस्टर तो है लेकिन इसे अपडेट नहीं किया है। किसी भी अधिकारी के पास सरकारी जमीन की सूची नहीं है, जिसे देखकर वह बता सके कि शहर में कहां पर सरकारी जमीन है। भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई के दौरान रजिस्टर देखा नहीं जाता है।

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13 बार बेची नजूल की जमीन
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 की जमीन 13 बार बिक चुकी है। इसका कुल रकबा 11 हजार मीटर से ज्यादा है। यहां अवैध ढंग से बनाए गए कांप्लेक्स में नीचे दुकानें और ऊपर आवास हैं। इसमें 87 कब्जेदारों को नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन कब्जा नहीं हटाया जा सका है। इसी तरह हापुड़ रोड पर होटल सईद नजूल की जमीन पर है, तो ईव्ज चौराहा स्थित कांप्लेक्स मेडिकोज भी नजूल की जमीन पर है। तान्या ऑटोमोबाइल और मृत्युंजय अस्पताल का निर्माण भी व्यावसायिक है।

ये भी नजूल की जमीन पर
डीआईजी ऑफिस के सामने बनाए अभिकर्म कांप्लेक्स की बेशकीमती जमीन का रकबा करीब 5200 मीटर है। आरजी डिग्री कॉलेज के बराबर स्थित वर्धमान कांप्लेक्स नजूल की जमीन पर है। भगत सिंह मार्केट नजूल जमीन पर है, जिससे निगम किराया वसूल रहा है।
 
नियमित कराना आसान नहीं
तमाम कॉलोनी में चकरोड, रजवाहा और सिंचाई विभाग की गूल आदि को काटकर मिला लिया गया है। वर्तमान में इनके सर्किल रेट इतने ऊपर जा चुके हैं कि बिल्डर के लिए इसे देना आसान नहीं होगा और कॉलोनी में रहने वाले लोग भी इसे नहीं देंगे। 

पैरवी भी गंभीरता से होगी
सरकारी जमीनों का रिकॉर्ड चेक किया जाएगा और वर्तमान स्थिति की जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी जमीन पर वाद चल रहा है तो उसकी गंभीरता से पैरवी कराई जाएगी। - के. बालाजी, डीएम, मेरठ

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