बिजली उपभोक्ताओं को देय तिथि से पहले बिल जमा करने पर मिलने वाली एक फीसदी छूट को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) का बिलिंग सॉफ्टवेयर ही गटक रहा है। उपभोक्ताओं को रोजाना करीब साढ़े चार लाख रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
उप्र विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की बिजली कंपनियों का राजस्व बढ़ाने के लिए देय तिथि से पहले बिल जमा करने पर बिल राशि पर एक फीसदी की छूट देने का प्रावधान कर रखा है। पीवीवीएनएल ने इसे बिलिंग सॉफ्टवेयर में अपडेट भी किया है। बिल में देय तिथि से पहले भुगतान करने पर एक फीसदी कम राशि अंकित की जाती है। बाद में भुगतान करने पर जो छूट बिल पर दिखाई जाती है, वह अगले बिल मे एरियर के नाम पर जोड़कर भेज दी जाती है।
औसतन एक हजार रुपये के बिल पर दस रुपये की छूट मिलती है। पीवीवीएनएल के तहत आने वाले 14 जिलों में रोजाना करीब डेढ़ लाख बिजली उपभोक्ता बिल जमा करते हैं। इनमें से करीब 30 फीसदी यानी 45 हजार उपभोक्ताओं को छूट नहीं मिलने से 4.50 लाख रुपये की छूट की राशि विभाग के खाते में जा रही है। अकेले मेरठ में ही छूट का करीब 40 हजार रुपया रोजाना डकारा जा रहा है।
अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
बिजली उपभोक्ताओं के हितों से हो रही इस खिलवाड़ के मामले को अधिकारी सॉफ्टवेयर की गलती बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खामी के चलते कभी कभी-कभी ऐसा हो जाता है। कुछ ही उपभोक्ताओं के बिलों में शिकायत है।
केस नंबर एक
कंकरखेड़ा स्थित आदर्श कॉलोनी के वरुण हर माह अपना घरेलू बिल देय तिथि से पहले जमा कराते हैं। इसके बाद भी बिल में मिली छूट अगले माह के बिल में जोड़कर भेज दी जाती है। सितंबर में उन्हें 21 रुपये छूट मिली थी। अक्तूबर के बिल में वह जुड़कर आ गई। इसी तरह जून में मिली 23 रुपये की छूट जुुलाई के बिल में जुड़कर आ गई।
केस नंबर दो
थापर नगर निवासी हरीश चंद बत्रा के पास तीन किलोवाट का कामर्शियल कनेक्शन है। उनके बेटे भानू बत्रा ने बताया कि बिल की देय तिथि 12 नवंबर है। 1501 रुपये के बिल में छूट के बाद 1486 रुपये अंकित हैं। 7 नवंबर को बिल जमा कराने पर कैशियर ने 1501 रुपये लिए। छूट की बाबत पूछने पर कहा कि सॉफ्टवेयर 1501 रुपये दिखा रहा है।
केस नंबर तीन
गंगानगर स्थित पार्क व्यू कॉलोनी निवासी अमित ने बताया कि वह छूट पाने के लिए कई महीने से अपना बिल देय तिथि से पहले जमा कराते आ रहे हैं। बावजूद इसके बिल पर मिली छूट अगले बिल में एरियर के नाम से जोड़कर भेज दी जाती है। परेशान होकर अब वह भुगतान की आंतिम तिथि के हिसाब से ही अपना बिल जमा कराने लगे हैं।
बिलिंग एजेंसी से बात करेंगे
बिल में गलती के मामले पहले भी संज्ञान में आए थे। इसे ठीक करने के लिए कहा गया था। अगर अभी तक ठीक नहीं हुआ है तो बिलिंग एजेंसी से बात की जाएगी।- अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी, पीवीवीएनएल, मेरठ