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अमर उजाला अपनत्व अभियान: कोरोना काल की कई दर्दनाक कहानियां, उजड़ गए हंसते-खेलते परिवार, बेसहारा हुए बच्चे

Mon, 31 May 2021 04:19 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मां के आंचल में संतान हर दुख भूल जाती है, वहीं पिता का सहारा बच्चों को सशक्त बनाता है। कोरोना महामारी ने शहर के सैकड़ों बच्चों को अनाथ कर दिया है। किसी घर में बच्चों के सिर से मां का साया उठा तो कहीं बच्चों के पिता का सहारा छिन गया। जिला प्रशासन की अब तक की सूची के उलट ऐसे पीड़ित परिवारों की संख्या कहीं अधिक है। अमर उजाला अपने अभियान के तहत ऐसे ही परिवारों को खोजकर उनके दुख-दर्द को साझा कर रहा है। अच्छी बात यह है कि समाज के कुछ लोग इनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी को सरकारी मदद नहीं मिली है।
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अनाथ हुए बच्चे। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मेरठ के माछरा ब्लाक क्षेत्र के गांव दबथला में कोरोना और कैंसर ने चार बच्चों को अनाथ कर दिया। फिलहाल, बच्चे चाचा और बुआ के पास हैं। अजय कुमार ने बताया कि उनके भाई ताराचंद (47) राजस्थान में नौकरी करते थे। डेढ़ वर्ष पूर्व उनकी पत्नी अदिति की कैंसर से मौत हो गई थी। कोरोना काल में ताराचंद गांव आ गया। उसे भी कोरोना हो गया। पिलखुवा के अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। ऐसे में बच्चे शैली (17) हर्ष (15), तानिया (13) और अभिषेक (11) बेसहारा हो गए।

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वहीं ग्राम प्रधान बिजेंद्री देवी, पंचायत सचिव प्रियंका, राशन डीलर के पति उपदेश और एडीओ माछरा शशी शर्मा ने अनाथ बच्चों के परिजनों से मुलाकात की। ग्राम पंचायत सचिव प्रियंका ने डीलर से राशन देने के लिए कहा है। एडीओ माछरा शशी शर्मा ने 2000, बीएनएम वैशाली ने 2000, प्रधान ने 2500, देवेश गोयल ने 5000 रुपये और ग्राम पंचायत सचिव ने 5000 रुपये से उनकी मदद की है। वहीं किठौर विधायक सत्यवीर त्यागी ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार कोरोना में माता-पिता को खो चुके बच्चों का सहारा बनेगी। बच्चों के पालकों को 4000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। 

दोस्ती में रहने के लिए दे दिया फ्लैट
बागपत रोड किशनपुरा निवासी मनोज कुमार शर्मा पठानपुरा स्थित गोल्डन बेल चिल्ड्रन एकेडमी में ट्रांसपोर्ट का कार्य देखता था। परिवार में एक बेटी आध्या डीयू कैंपस से पढ़ाई कर रही है। 20 अप्रैल को तबीयत खराब होने पर मनोज को अस्पताल में भर्ती किया गया। एक मई को उनकी मृत्यु हो गई। स्कूल प्रबंधक अशोक कुमार गुप्ता की बेटी की मृतक मनोज की पुत्री आध्या से दोस्ती है। ऐसे में गुप्ता परिवार आध्या का सहारा बना। प्रबंधक ने अंसल में अपना फ्लैट आध्या और उसकी मां संध्या को रहने के लिए दे दिया है। अशोक कुमार कहते हैं कि अगर बच्ची को सरकार की तरफ से मदद मिली तो वह अपनी पढ़ाई पूरी कर पाएगी।

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शुगर थी फिर भी वैक्सीन लगा दी, दो दिन में माता-पिता की मौत
शास्त्री नगर निवासी स्वाति चौधरी को दो दिन में माता-पिता की छाया से वंचित होना पड़ा। स्वाति का आरोप है कि एसआई पद से सेवानिवृत्त उनके पिता राजवीर सिंह हाई शुगर से ग्रस्त थे। इसके बावजूद भी उन्हें कोविड वैक्सीन लगा दी गई। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। चिकित्सकों ने इंसुलिन देना शुरू कर दिया लेकिन, 18 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई। मां ऊषा को इसी बीच फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया। आरटीपीसीआर रिपोर्ट आने तक उन्हें कोविड वार्ड में शिफ्ट नहीं किया गया। 19 अप्रैल को मां की भी मौत हो गई। परिवार में अब स्वाति और उसका छोटा भाई ही रह गए हैं।

जुडवां बच्चों को जन्म देते ही चल बसी मां
छावनी क्षेत्र निवासी गौरव आईटी कंपनी में कार्यरत हैं। दो जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। एक मई को बच्चों के दादा का भी स्वर्गवास हो गया। गौरव खुद भी कोरोना की चपेट में आ गए। इस दौरान रिश्तेदारों ने बच्चों को संभाला। गौरव कहते हैं कि पत्नी की मृत्यु से बुरी तरह टूट चुका हूं। मुश्किल घड़ी में खुद को संभालकर बच्चों पर ध्यान देने का प्रयास कर रहा हूं।

छह बेटियां पर कमाने वाला चला गया
खरखौदा थाना क्षेत्र के अतराड़ा निवासी नफीस अंसारी मजदूरी कर परिवार चला रहा था। नफीस की छह बेटियां हैं। 26 अप्रैल को नफीस की तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती किया गया। 30 अप्रैल को उनका निधन हो गया। अब परिवार के पास कमाई का साधन नहीं बचा है। बड़ी बेटी रूही और गुलफशां ने कहा कि हम दोनों बहनें मेहनत कर परिवार के भरण-पोषण की कोशिश करेंगी। सबसे छोटी महजू 10 साल की है। गुलफशां ने कहा कि सरकार से मदद मिलने पर ही उनका भविष्य सुरक्षित रह सकता है।
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