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नए छात्र-छात्राओं का सहयोग करें पूर्व छात्र : हरिओम वत्स

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मेरठ। एनएएस कॉलेज में रविवार को पूर्व छात्र यादों में खो गए। देश के कोने-कोने से आए बुजुर्गाें की एक-दूसरे से मिलकर आंखें नम हो गईं। कॉलेज से 1970 में एमएससी करने वाले इसरो के पूर्व पाठ्यक्रम निदेशक हरिओम वत्स ने कहा कि पूर्व छात्रों को एक मंच पर लाने का प्रयास सराहनीय है। सभी पुरातन छात्रों को नए छात्र-छात्राओं का सहयोग करना चाहिए। अपनी पुरानी संस्था के लिए हमें थोड़ा समय निकालना चाहिए।
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पुरातन छात्र परिषद के तत्वावधान में रविवार को एनएएस कॉलेज में सम्मेलन हुआ। मुख्य अतिथि इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हरिओम वत्स रहे। सम्मेलन में बुजुर्ग हो चुके छात्र भी अपने पुराने मित्रों से मिलकर भावुक हो उठे और अपने पुराने दिनों को याद किया। मंच पर बोलते हुए वक्ताओं की आंखों में आंसू भी आ गए। सभी ने एक सुर से कॉलेज के पुराने स्वरूप को बचाए रखने और नए कोर्स शुरू करने पर जोर दिया। इस संस्था की वजह से ही आज हम एक मुकाम पर है। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंध समिति सचिव आदित्य शर्मा, ट्रस्टी पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, प्राचार्य प्रो. मनोज अग्रवाल, पुरातन छात्र समिति अध्यक्ष नैन सिंह, विष्णु कुमार शर्मा ने किया।
अमित शर्मा ने कहा कि पुरातन छात्रों का सम्मेलन कॉलेज में पहली बार हुआ है। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत हुए। पूर्व हॉकी खिलाड़ी विनोद शर्मा, बीएसएफ के आईजी ललित कुमार, हाईकोर्ट जज गजेंद्र सिंह, पूर्व ओलंपियन रोमियो जेम्स, प्रमोद बाटला, दिलीप सान्याल, फुटबॉल खिलाड़ी विष्णु कुमार शर्मा, रमन त्यागी, आदेश गोयल और पूर्व विधायक वजीर यादव को सम्मानित किया गया। पुरातन छात्र सह सचिव दीपक शर्मा, प्रो. एसके शर्मा, डाॅ. अजेंद्र शर्मा, प्रो. ललिता यादव, प्रो. विवेक त्यागी, प्रो. अलका तिवारी, डाॅ. आरआर भारद्वाज, आभा शर्मा, अजित सिंह, स्वाति शर्मा, डाॅ. अम्बिका कालरा, पुनीत शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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स्पेस इंडस्ट्री में बहुत अवसर
इसरो के पूर्व पाठ्यक्रम निदेशक हरिओम वत्स ने वार्ता में कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी में इसरो का काम बहुत अच्छा है। सबसे सस्ते सेटेलाइट छोड़ने और एक रॉकेट से सबसे अधिक सेटेलाइट छोड़ने में इसरो अव्वल है। नासा भी अपने सेटेलाइट इसरो के माध्यम से छुड़वा रहा है। भारत में स्पेस इंडस्ट्री में युवाओं के लिए बहुत अवसर है। एस्ट्राेनॉकी और स्पेस टेक्नोलॉजी में प्रतिभाओं के लिए बहुत अवसर है। इसरो द्वारा शीघ्र ही प्रोब-3 सेटेलाइट छोड़ा जाएगा। इससे भारत में संचार क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्पेस की दुनिया जाने के लिए इसरो कई अवसर दे रहा है। इसरो का स्पेस एंड साइंस टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट त्रिवेंद्रम में है। वहां 12वीं कक्षा पास छात्रों को प्रवेश परीक्षा के बाद एडमिशन मिलता है। सरकार भी स्पेस इंडस्ट्री को बढ़ावा दे रही है। इसरो एमएसी फिजिक्स, गणित प्रथम वर्ष के छात्रों को इसरो दो साल के लिए समर ट्रेनिंग में शोध करने का अवसर देता है। श्री हरिकोटा में रॉकेट छोड़ने की गतिविधि लाइव दिखाई जाती है।

हॉकी मैदान को देखकर भाव विभोर हुए खिलाड़ी
पूर्व ओलंपियन रोमियो जेम्स व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रमोद बाटला अपने पुराने हॉकी मैदान को देखकर भाव विभोर हो गए। 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे रोमियो जेम्स ने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने 1976-78 में कॉलेज से बीए किया और कॉलेज में खेलों का माहौल बनाने का श्रेय पूर्व प्राचार्य डॉ. एससी शर्मा को दिया। 1982 से 1985 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे रोमियो ने 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भाग लिया। इसके बाद कोचिंग से जुड़ गए। 2015 में रोमियो को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रमोद बाटला ने भी 1978 में बैंकाक एशियाई खेलों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।
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