मेरठ। चकबंदी की जमीन में फेरबदल और करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा कराने के मामले में बंदोबस्त चकबंदी विभाग का भ्रष्टाचार सामने आया है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों को सुबूत सौंपे गए हैं। डीएम दीपक मीणा ने एडीएम प्रशासन को जांच सौंप दी है। जांच रिपोर्ट के बाद बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
मामला हस्तिनापुर ब्लाॅक के सैफपुर-फिरोजपुर गांव का है। यहां मूलरूप से चंडीगढ़ निवासी सेवानिवृत कर्नल चरणजीत लहर और उसके एक रिश्तेदार की सैफपुर गांव में करोड़ों रुपये कीमत की कृषि भूमि है। उनकी भूमि की चकबंदी हो या नहीं, इस पर कई बार विवाद हो चुका है। कुछ दिन पहले सेवानिवृत कर्नल चरणजीत ने डीएम को शिकायती पत्र दिया था। आरोप लगाया कि बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी संजय कुमार ने चकबंदी में उनकी जमीन में फेरबदल और सरकारी जमीन पर कब्जा कराने की बात कहकर रिश्वत मांग रहे हैं। उसके कई प्रमाण भी उन्होंने अधिकारियों को दिए हैं। भ्रष्टाचार की शिकायत पर डीएम ने जांच बैठा दी है।
इस मामले में कुछ स्थानीय लोगों के बयान लिए गए हैं। डीएम ने एडीएम प्रशासन अमित कुमार सिंह को जांच का जिम्मा दिया है। एडीएम प्रशासन ने भ्रष्टाचार से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई है। इस संबंध में बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी संजय कुमार ने फोन पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। वहीं, सेवानिवृत कर्नल चरणजीत ने बताया कि उन्होंने अपने अधिवक्ता के जरिये डीएम को शिकायत पत्र दिया है। डीएम की जांच रिपोर्ट में सच सामने आएगा।
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- भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। आरोप गंभीर हैं। बंदोबस्त अधिकारी पर लगे आरोपों की जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई सुनिश्चित होगी। साक्ष्यों के आधार पर जांच चल रही है। -दीपक मीणा, डीएम