प्रदेश में योगीराज आते ही मीट शॉप संचालकों की सांस अटक गई। ऐसे में वो सोच रहे हैं कि अब क्या किया जाए। यह लगभग सभी जानते है कि इस कारोबार में कमाई बहुत अच्छी है। फिर चाहे कारोबार छोटा हो या बड़ा, लेकिन कारोबार के हिसाब से लाभ अच्छा होता है।
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पशु कटान
इस कारोबार को जारी रखने के लिए सरकार ने एक नियम बना रखा है। यह नियम जानने के लिए आगे जरुर पढ़ें...
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मीट प्लांट
बहुत कम लोग जानते है कि सरकार केवल अवैध बूचड़खानों को सील कर रही हैं न कि वैध बूचड़खानों को, बस यहीं वो नियम है जिसका पालन कर व्यापारी अपना कारोबार जारी रख सकते हैं।
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बूचड़खाना सील
बूचड़खानों पर कार्रवाई होने बाद दो दिन के भीतर 50 से ज्यादा मीट शॉप के लिए रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा किए गए थे और अब यह आकंड़ा 200 से पार जा चुका है। अब आप अंदाजा लगा सकते है कि अगर मीट शॉप संचालक इसी तरह रजिस्ट्रेशन कराते रहे तो पशुओं के कटान पर कार्रवाई का क्या मतलब होगा। कुछ लोगों का कहना है कि बूचड़खाने कभी बंद नहीं हो सकते है, तो क्या इसका मतलब वो लोग बिल्कुल सही बोल रहे हैं।
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मीट प्लांट
गौरतलब है कि अभिहित अधिकारी रणधीर सिंह ने कहा था कि काफी लोग अब मीट शॉप के लिए रजिस्ट्रेशन पाने को लेकर लाइन में खड़े हैं। सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारी अब पहले निरीक्षण करेंगे, उसके बाद ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करेंगे।
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मीट प्लांट
वहीं, एफडीए की तरफ से लगातार अपील की जा रही थी कि खानपान से जुड़ी कोई भी वस्तु अगर किसी के द्वारा बेची जाती है तो उसे एफडीए से रजिस्ट्रेशन लेना होगा। लेकिन किसी ने अमल नहीं किया था। अब सूबे में सरकार बदलते ही रजिस्ट्रेशन के लिए लाइन लग गई है।
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बूचड़खाना
रणधीर सिंह का कहना था कि शहर में काफी मीट की दुकानें हैं। रजिस्ट्रेशन लेने से पहले कुछ अनिवार्य शर्तें हैं जिसे मीट शॉप संचालित करने वाले को पूरा करना होगा। जिस दुकान का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा उस पर कार्रवाई होगी।
युवा सेवा समिति ने बूचड़खानों को टारगेट करने पर विरोध जताया था। रशीद नगर लिसाड़ी रोड पर आयोजित सभा में समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष बदर अली ने कहा था कि जो मीट फैक्ट्री एवं बूचड़खाने अवैध रूप से संचालित हैं, वह बंद होने चाहिए।