हालांकि लोकसभा चुनाव में मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के लिए सपा किस पर दांव चलेगी, इसे लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है। कई दावेदार हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल भाजपा के टिकट पर निगाहें हैं। भाजपा ने अभी इस सीट से प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है।
सपा का रालोद से गठबंधन खत्म हो गया था। रालोद का भाजपा से गठबंधन हो गया है और सपा का कांग्रेस से। कयास लगाए जा रहे हैं कि मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट सपा के खाते में जाएगी। सपाइयों ने टिकट के लिए माथापच्ची भी शुरू कर दी है।
सपा में टिकट के लिए दावेदारों में पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने तो इस साल जनवरी में अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्टर भी लगा दिया था, जिस पर मेरठ- हापुड़ लोकसभा, अपना नाम और सपा का सिंबल लगा था।
हालांकि उन्होंने खुद को प्रत्याशी नहीं लिखा, पर इससे साफ इशारा है कि वह चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। इस संबंध में उन्होंने स्वीकार भी किया कि वह अगर पार्टी हाईकमान, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उन्हें चुनाव लड़ाएंगे तो वह मजबूती से चुनाव लड़ेंगे।
पिछली बार वह बुलंदशहर से सपा टिकट पर चुनाव लड़े थे, हालांकि हार गए थे। सपा में मेरठ से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में अकेले योगेश वर्मा नहीं हैं, इनके अलावा सरधना विधायक अतुल प्रधान, किठौर विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, शहर विधायक रफीक अंसारी और पूर्व सांसद हरीश पाल के पुत्र नीरज पाल प्रमुख रूप से शामिल हैं।
हालांकि पार्टी से इस तरह की बातें भी छनकर आ रही हैं कि इस बार हो सकता है कि सपा किसी विधायक को टिकट न दे, लेकिन ऐसा अभी किसी ने खुलकर नहीं कहा है।
जल्द ही घोषणा होने की उम्मीद है। सपा प्रवक्ता विजय राठी का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व टिकट तय करेगा। अभी कोई भी फैसला नहीं हुआ है। पार्टी हाईकमान से अभी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।