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सिंघम दिखाएंगे मुजफ्फरनगर में 28 साल पहले पड़ी आयकर रेड का सच

Fri, 09 Feb 2018 06:31 PM IST
कपिल कुमार/ मुजफ्फरनगर
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फिल्म द रेड में आयकर छापे के दौरान अजय देवगन और उनकी टीम
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14 सितंबर 1989, दिन बृहस्पतिवार, समय दोपहर 11.30 बजे। 28 साल पहले की यह तारीख बॉलीवुड की स्क्रीन पर फिर दोहराई जाएगी। मुजफ्फरनगर में उस दिन देश की सबसे बड़ी आयकर रेड पड़ी थी। दो बड़े उद्यमियों चितरंजन स्वरूप और हरीश छाबड़ा के प्रतिष्ठानों पर पड़ी रेड के दौरान आयकर की टीमों पर हमला हुआ था। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि सरकार को सीबीआई जांच करानी पड़ी। इस घटना पर मशहूर फिल्म अभिनेता अजय देवगन की नई फिल्म द रेड बन रही है। फिल्म का ट्रेलर जारी हो चुका है, जबकि रिलीज 16 मार्च को होगी। 
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देश की सबसे बड़ी आयकर विभाग की रेड पर अभिनेता अजय देवगन की फिल्म द रेड की कहानी यूपी की दो सत्य घटनाओं पर आधारित है। इनकम टैक्स की यह कार्रवाई अलग-अलग वर्षों में हुई। उन्हीं को जोड़कर निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने यह स्टोरी फिल्मी परदे पर उतारी है। 14 सितंबर 1989 को आयकर विभाग के 88 काबिल अफसरों को मेरठ बुलाया गया, जिन्हें लगा कि रेड आसपास ही डलेगी। सुबह 10 बजे के करीब अफसरों को सीलबंद लिफाफे मिले। रेड कहां और किसके घर पड़ऩी है, यह ब्योरा दिया गया था। ठीक 11.30 बजे मुजफ्फरनगर में दो बड़े कारोबारी चितरंजन स्वरूप और हरीश छाबड़ा की फैक्ट्रियों, दफ्तरों और आवासों पर नौ टीमों ने एकसाथ रेड डाल दी। एक टीम को चितरंजन के बिजनौर के प्रतिष्ठान पर भेजा गया।
जैसे ही रेड पड़ी, हर जगह आयकर अफसरों को घेर लिया गया। चितरंजन स्वरूप उस वक्त लखनऊ में थे, जबकि हरीश छाबड़ा नईमंडी के गणपति कांपलेक्स 72बी ऑफिस में बैठे थे। गांधी कालोनी में छाबड़ा के घर पहुंची टीम को विरोध झेलना पड़ा, लोग एकत्र हो गए। चितरंजन के सराफा बाजार के प्रतिष्ठान अनुपम ज्वैलर्स पर आयकर अफसरों से हाथापाई हुई। इसके साथ ही नईमंडी में चितरंजन के पार्टनर एसआर भसीन के आवास पर भी रेड डाली गई। कारोबारियों के आवासों में टीमों का जबरदस्त विरोध हुआ। मारपीट में कई अफसर घायल हो गए।
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छाबड़ा की मेरठ रोड स्थित समीर इस्पात फैक्ट्री में घुसी आयकर टीम पर कर्मचारियों ने धावा बोल दिया। अफसर लहूलुहान हो गए। टीम की सुरक्षा में लगाए गए पुलिसकर्मी भी कुछ नहीं कर पाए। हंगामे और विरोध में आयकर अफसरों के कपड़े भी फट गए। हाथ-पैरों में गंभीर चोटें आईं। एटीओ आरएस चड्ढा सहित सभी घायलों को मेरठ मेडिकल में भर्ती कराया गया था। उस समय आयकर के डिप्टी कमिश्नर पंकज गुप्ता ने आरोप लगाया था कि अनुपम ज्वैलर्स पर अफसरों को फुटबाल की तरह उठाकर फेंका गया, जबकि छाबड़ा की फैक्ट्री पर लोहे की रॉड और लेदर बेल्टों से पिटाई की गई। भीड़ ने वाहन भी तोड़ दिए। घायल अफसरों को कपड़े मांगकर वापस लौटना पड़ा था। 
मामले ने इतना तूल पकड़ा कि व्यापारी और आयकर कर्मचारी-अधिकारी सड़कों पर उतर आए। दो हफ्ते तक उत्तर भारत के कारोबारी हड़ताल पर रहे। इंडियन रिवेन्यू सर्विस एसोसिएशन के दबाव में वित्त सचिव गोपी अरोरा और वित्त राज्यमंत्री अजित पांजा को सूबे के सीएम रहे एनडी तिवारी से बात करनी पड़ी। उस समय चितरंजन स्वरूप का कांग्रेस में काफी दबदबा था, जबकि हरीश छाबड़ा की गिनती खाद्य रसद मंत्री हुकुम सिंह के करीबियों में होती थी। उस वक्त के सीएम ने मामले की सीबीआई जांच कराई, जिसमें हरीश छाबड़ा को देहरादून की सीबीआई कोर्ट ने वर्ष 2013 में दो साल की सजा सुनाई। चितरंजन पक्ष के विरुद्ध सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। हालांकि उन्हें सीबीआई कोर्ट ने दोषी नहीं माना। फिल्म में दूसरी आयकर रेड कानपुर बिजनेसमैन एवं पूर्व विधायक सरदार इंदर सिंह के घर 16 जुलाई 1981 की घटना पर आधारित है। 
 
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आयकर कमिश्नर बने हैं देवगन

फिल्म द रेड
मुजफ्फरनगर में आयकर टीम पर रेड के दौरान हिंसा से जुड़ी अजय देवगन की फिल्म द रेड के निर्देशक राजकुमार गुप्ता इससे पहले घनचक्कर, नो वन किल्ड जेशिका, आमिर जैसी फिल्में बना चुके हैं। फिल्म में अभिनेत्री इलियाना डिक्रूज देवगन की पत्नी बनी हैं, जबकि देवगन ने यूपी की इन दो बड़ी रेड के वक्त आयकर के डिप्टी कमिश्नर अमय पटनायक का किरदार निभाया है। सिंघम और गंगाजल जैसी कामयाबी फिल्मों का ही लुक देवगन ने द रेड  में दिखाया है। यह कहानी रितेश शाह ने लिखी है, जो सिटी लाइट, एयरलिफ्ट, मदारी, पिंक और डैडी जैसी मूवी लिख चुके हैं।
आयकर रेड के पीछे  थी सियासत: छाबड़ा 
आयकर रेड मामले में दोषी करार दिए गए हरीश छाबड़ा की गिनती शहर के बड़े कारोबारियों में हुआ करती थी। रेड के बाद उनकी समीर इस्पात इंडस्ट्री 1997 तक चली। इस घटना ने उनकी जिंदगी को किस तरह बदल दिया, यह खुद हरीश छाबड़ा ने अमर उजाला’ से बातचीत में बयां किया। 
मेरठ रोड पर समीर इस्पात का अब ढांचा ही बचा है। सीबीआई ने आयकर रेड के मुकदमे में छाबड़ा को वर्ष 2013 में सजा सुनाई थी। राज्यपाल की अनुकंपा के आधार पर उन्हें 14 माह में ही रिहा कर दिया गया। हरीश छाबड़ा बताते हैं कि रेड की पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित थी। छापे में उनके यहां से कुछ नहीं मिला। कोर्ट में विभाग कोई रिकवरी स्लिप नहीं दे पाया। द खांडसारी गुड़ मर्चेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष छाबड़ा गांधी कालोनी हाउसिंग कोआपरेटिव सोसायटी के चेयरमैन भी रहे हैं। बकौल छाबड़ा, टीम ने उनके दफ्तर के शीशे तोड़ दिए, जिसकी वजह से हंगामा हुआ था। फैक्ट्री पर हमले का मुकदमा कई दिन बाद मंसूरपुर थाने में दर्ज कराया गया। इस्पात के अलावा उनका चीनी का थोक का बड़ा कारोबार था, लेकिन मामला देश की सुर्खियां बनने की वजह से उनके खिलाफ कई झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए। उन्हें 12 साल तक इन मुकदमों की पीड़ा झेलनी पड़ी। उधर, दूसरे कारोबारी चितरंजन स्वरूप बाद में सपा सरकार में दो बार राज्यमंत्री बने। वर्ष 2015 में उनका निधन हो गया। अनुपम ज्वैलर्स भी पारिवारिक बंटवारे में अलग फर्म हो गईं। 
 
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