शहर में हर साल पटाखों के शोर से हवा जहरीली होती जा रही है। लेकिन करीब 20 लाख की आबादी के बीच शहर का एक हिस्सा ऐसा भी है, जहां पटाखों का शोर कम होता है। प्रदूषण विभाग के आंकड़ों की माने तो कैंट क्षेत्र में बीते दस सालों से ध्वनि प्रदूषण स्थिर है।
शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण से शहरवासियों का जीना मुहाल हो रहा है। हर साल अक्तूबर माह में ये हालात होते हैं कि बच्चों को स्कूल तक मास्क लगाकर आना पड़ता है। एनसीआर क्षेत्र में पांच दिन पहले मेरठ की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रिकार्ड की गई।
वर्ष कैंट हॉस्पिटल कैंटोनमेंट बोर्ड
2018 63.5 59.2
2017 52.8 58.7
2016 55.9 60.4
2015 52.5 61.2
2014 51.8 66.6
2013 52.2 67.3
2012 63.4 65.6
2011 60.1 58.0
2010 57.6 62.1
2009 56.1 59.9
विशेषज्ञों की माने तो वायु और ध्वनि प्रदूषण का बढ़ना सही नहीं है। यह स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है। इसका पर्यावरण पर दुष्प्रभाव दिखने लगा है। प्रदूषण का असर अक्तूबर से जनवरी तक सबसे अधिक दिखाई देता है। इन दिनों मौसम में काफी नमी आ जाती है, जो पार्टीकल हवा में ही घुलते रहते हैं।
कैंट क्षेत्र में पटाखों का शोर कम रहता है। हर साल यही स्थिति रहती है। अगर इस क्षेत्र की तरह अन्य शहर के हिस्सों में भी लोग जागरुक हो जाए तो शहर में प्रदूषण को काफी कम किया जा सकता है। अगर पिछले वर्षों की तुलना करें तो वाहनों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है, जो सहीं नहीं है।
-आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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