महिला चिकित्सालय की सीएमएस आभा वर्मा का कहना है कि यदि कोई गर्भवती एचआईवी से ग्रसित है तो जरूरी नहीं है कि उसका बच्चा भी एचआईवी पॉजिटिव ही पैदा हो। ऐसी परिस्थिति में अच्छा उपचार और देखभाल ही नवजात शिशु के पॉजिटिव होने की संभावना को कम कर सकता है। नवजात में इसके संक्रमण की केवल 25 से 40 प्रतिशत तक ही संभावना रहती है। उनकी सलाह है कि संक्रमण को कम करने वाली दवाएं लेकर सरकारी अस्पताल ही में प्रसव करायें।
एड्स के लक्षण
1. लगातार बुखार आते रहना।
2. लूज मोशन यानी दस्तों का बंद न होना।
3. शरीर पर कहीं भी चकते या लाल दाने निकलना।
4. लगातार शरीर का वजन घटना।
5. टीबी से ग्रसित होना।
बचाव के लिए क्या करें
1. संयम बरतें यानी असुरक्षित यौन संबंध न बनाएं।
2. रक्त चढ़वाने से पहले उसकी जांच अवश्य करवाएं।
3. इंजेक्शन लगवाने से पूर्व सिरिंज को देख लें कि सील बंद और नई है।
4. दो से चार माह तक बुखार न छूटे तो जांच अवश्य कराएं।
5. प्रत्येक गर्भवती महिला एचआईवी की जांच अवश्य कराएं।
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