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कृषि मेला: पाकिस्तान के बॉर्डर तक बासमती के बीज की धूम, 400 किमी दूर लग्जरी गाड़ियों में बीज लेने पहुंचे किसान

Wed, 24 Apr 2024 09:43 AM IST
Dimple Sirohi मोहित कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, मोदीपुरम

सार

मेरठ में बासमती के बीज की धूम पाकिस्तान बाॅर्डर से सटे पंजाब के जिलों तक है। यहां के किसान मेरठ में बासमती का बीज लेने के लिए आ रहे हैं।
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चावल की खेती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में बासमती के बीज की धूम पाकिस्तान बाॅर्डर से सटे पंजाब के जिलों तक है। यहां के किसान मेरठ में बासमती का बीज लेने के लिए आ रहे हैं। बासमती का स्वाद बढ़ाने के लिए किसान भी अच्छा बीज खरीदने के लिए लगभग 400 किलों मीटर दूर से पहुंच रहे है। कई किसान लग्जरी गाड़ियों में बीज लेने पहुंचे। पंजाब के फाजिलका, फिरोजपुर, जलालाबाद, अमृतसर, मोगा, मानसा के अलावा हरियाणा सिरसा, फतेहाबाद,एलनाबाद, पानीपत समेत पूरे हरियाणा के किसान यहां आए हैं।

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बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम में शनिवार से बीज का वितरण शुरु किया गया। पहले दिन ही चार साल का रिकॉर्ड टूटा। लगभग एक हजार किसानों ने 60 लाख रुपये से अधिक का बीज खरीदा। इसके बाद सोमवार को किसानों ने 20 लाख रुपये का बीज खरीदकर नया रिकाॅर्ड बनाया है।

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प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश ने बताया कि दो दिन में ही करीब 80 लाख रुपये का बीज बिक चुका है। पहले ही दिन चार प्रजातियों का बीज खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि सोमवार से पूसा बासमती-1847 पूसा बासमती 1885, पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती एक आदि प्रजातियों का बीज की बिक्री शुरू की की गई। पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 1692, पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 18860 प्रजाति का बीज खत्म हो गया है।  

ये हुई बासमती के बीज की बिक्री
वर्ष 
2021- 41 लाख रुपये
वर्ष 2022- 45 लाख रुपये
वर्ष 2023- 50 लाख रुपये
वर्ष 2024- 80 लाख रुपये

सर्वोत्तम बीज के रूप में खास पहचान
डॉ. रितेश शर्मा का कहना है कि साल दर साल बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई है। मेरठ के बासमती बीज की पहचान देश में सर्वोत्तम बीज के रूप में होती है। इसलिए 400 किलोमीटर दूर से किसान बीज लेने आए हैं।

किसानों ने बनाए हैं ग्रुप
किसानों ने ग्रुप बना रखा है और ग्रुप के माध्यम से वह अपना बीज लेकर आते हैं। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किसान पहले ही बीज की बुकिंग करा देते हैं। बीज जल्दी लेने के चक्कर में किसान लग्जरी गाड़ियों से भी पहुंच रहे हैं। क्रेटा, स्कार्पियों, सफारी, हेरियर समेत अन्य गाड़ी जिनकी डिग्गी बड़ी है, उनमें ही किसान बीज लेकर जा रहे हैं।
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