उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एतिहासिक जीत के बाद अब भाजपा की नजर नगर निकाय चुनाव पर टिक गयी है। हालांकि निकाय चुनाव में प्रदेश के नगर निगम पर अधिकांश भाजपा का ही कब्जा है। लेकिन इसे बरकरार रखने के साथ इस बार भाजपा की कोशिश नगर पंचायतों पर अधिकार जमाने की है।
जिले में वर्तमान में एक नगर निगम, दो नगर पालिका और दस नगर पंचायतें हैं। जबकि इस बार सपा सरकार ने ग्राम पंचायतों शाहजहांपुर, हर्रा और खिवाई को नगर पंचायत का दर्जा दिया है, तो इस बार चुनाव में 13 नगर पंचायतें शामिल होंगी। वर्तमान में भाजपा के कब्जे में नगर निगम के साथ ही परीक्षितगढ़ नगर पंचायत शामिल है। जहां पर भाजपा के महापौर और चेयरमैन है।
निकाय चुनाव की कवायद शुरू हो चुकी है। हालांकि आरक्षण तय नहीं हुआ है। लेकिन इससे पूर्व ही दावेदारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी है। इस बार महापौर की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने की उम्मीद ज्यादा है। क्योंकि पिछले 28 साल में अभी तक अभी तक एक बार भी अनुसूचित जाति को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। ऐसे में अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के नेता डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी के साथ ही पूर्व विधायक गोपाल काली का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
वहीं, यदि सीट पिछड़ा वर्ग में जाती है तो पंजाबी कोटे से एक बार फिर वर्तमान महापौर हरिकांत अहलूवालिया जहां मजबूत दावेदार होंगे, तो पंजाबी कोटे से ही पूर्व सभासद और महानगर उपाध्यक्ष ललित नागदेव के अलावा संयुक्त व्यापार संघ के सरदार दलजीत सिंह के साथ पूर्व महापौर सुशील गुर्जर को भी दावेदार माना जा रहा है। हालांकि पंजाबी बिरादरी को प्रतिनिधित्व देने के चलते किसी पंजाबी बिरादरी से ही दावेदार आने का दावा भाजपाई कर रहे हैं।
सामान्य पर ज्यादा खींचतान
सबसे ज्यादा खींचतान सीट सामान्य होने पर होगी। क्याेंकि सामान्य सीट पर वर्तमान महापौर के साथ ही सबसे प्रमुख दावेदारी पूर्व सभासद और तेजतर्रार नेता अजय गुप्ता नटराज की मानी जा रही है। अजय गुप्ता को नगर निगम राजनीति का चाणक्य भी माना जाता है। जबकि कुछ लोग पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, संयुक्त व्यापार संघ के नेता पवन मित्तल का नाम भी चर्चा में ला रहे हैं।
निकाय चुनाव की तैयारी में जुटा प्रशासन
वहीं, जिला प्रशासन ने निकाय चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। जिला निर्वाचन कार्यालय ने तमाम विभागों के तैनात कर्मचारियों का डाटा मांगा है। डीएम ने सभी विभागीय अफसरों को 31 मार्च तक डाटा उपलब्ध न कराने पर वेतन रोकने की चेतावनी जारी की है।
नगर निकायों का कार्यकाल भी करीब पूरा होने को है। निर्वाचन कार्यालय के अनुसार मई या जून में चुनाव कराना प्रस्तावित है। हालांकि इससे पहले नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं और नगर निगम में अध्यक्ष और महापौर के पद सहित सभासदों और पार्षदों के वार्डों का आरक्षण तय होना है। जबकि इससे पूर्व निगम क्षेत्र का नया परिसीमन भी प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि निगम क्षेत्र का नये परिसीमन में विस्तार होगा। जिसके बाद निगम के 80 वार्डों की संख्या बढ़कर 100 तक जाने की उम्मीद के साथ इन सबका आरक्षण भी बदल जाएगा। परिसीमन और आरक्षण जहां शासन से तय होना है, वहीं चुनावी तैयारी स्थानीय स्तर पर होनी है।