गंगाजल पर संकट के बादल छा गए हैं। धन के अभाव में कभी भी गंगाजल की सप्लाई रुक सकती है। भीषण गर्मी में करीब आठ लाख लोग प्रभावित होंगे। भोले की झाल पर लगे पानी के प्लांट के संचालन की स्थायी व्यवस्था न होने के कारण ऐसा होगा। अभी तक जल निगम प्लांट का रखरखाव कर रहा है, लेकिन पैसा न होने के कारण अब वह इसे जारी रखने में असमर्थ है। विभाग की ओर से नगर निगम को पत्र भी लिख दिया गया है। वहीं नगर निगम भी प्लांट को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने से परहेज कर रहा है। दो विभागों के बीच शहर का 40 प्रतिशत क्षेत्रफल फंस गया है।
एक करोड़ 80 लाख वार्षिक खर्च
भोले की झाल पर लगे गंगाजल शोधन प्लांट को संचालित करने के लिए एक साल में एक करोड़ 80 लाख रुपये का खर्च आता है। संचालन को टेक्निकल कर्मचारियों की जरूरत होगी, जो न तो जल निगम के पास हैं और न नगर निगम के पास। इतना ही नहीं प्लांट के संचालन के लिए अलग से कोई बजट भी नहीं दिया गया है। इससे अंदेशा है कि प्लांट कभी भी बंद हो सकता है।
पिछले माह ठेकेदार ने रोक दिया था पानी
जल निगम ने जेएनएनयूआरएम योजना के तहत शहर में गंगाजल की जिम्मेदारी प्रतिभा कंपनी को दी थी। कंपनी ने जहां भोला झाल पर जल शोधन प्लांट बनाया, वहीं शहर में पाइप लाइन भी डाली। पानी के दबाव में फटने वाली पाइप लाइन का रखरखाव तो कंपनी कर रही है, लेकिन धन न मिलने के कारण प्लांट चलाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। पिछले माह तीन-चार दिन के लिए कंपनी ने भोले की झाल का प्लांट बंद कर दिया था। जिसके कारण शहर में गंगाजल आपूर्ति नहीं हो पायी थी। अमर उजाला ने मामले को उजागर किया तो जल निगम ने कंपनी के अधिकारियों से बात कर होली के चलते प्लांट शुरू करवाया था।
ये इलाके हो सकते हैं प्रभावित
- सर्किट हाउस जलाशय से पानी की सप्लाई
शहर के साकेत, सिविल लाइन क्षेत्र, सूर्य नगर, प्रगति नगर, ऑफिसर कॉलोनी, वेस्टर्न कचहरी रोड, शिवाजी रोड, नंगला बट्टू, अशोक वाटिका, प्रभात नगर, मोहनपुरी, मंगलपांडे नगर समेत 17 कॉलोनी प्रभावित होंगी।
- घंटाघर टाउन हॉल जलाशय
शहर के घंटाघर टाउन हॉल परिसर स्थित जलाशय से घंटाघर, पत्थर वालान, सरायलालदास, लाला का बाजार, नील गली, शीशमहल, डालमपाड़ा, होली चौक, कागजी बजार, जलीकोठी, केसरगंज, छतरीवाला पीर, खैरनगर, शहर सर्राफा आदि इलाकों में पानी की सप्लाई होती है।
- शर्मा स्मारक जलाशय से पानी की सप्लाई
शर्मा स्मारक जलाशय से बच्चा पार्क, ईव्ज चौराहा, छीपीटेंक शिव चौक, बुढ़ाना गेट सहित आसपास के बड़े इलाके में गंगाजल की सप्लाई होती थी।
- विकासपुरी जलाशय से पानी की सप्लाई
विकास पुरी में छोटा जलाशय है। इस इलाके से लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र, कांच का पुल, विकासपुरी आदि क्षेत्र से जुड़े मोहल्लों में पानी की सप्लाई होती है।
ये है योजना
जेएनएनयूआरएम के तहत 2010 में शहर में लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से गंगाजल योजना शुरू हुई थी। करोड़ों रुपये खर्च करके शहर भर में गंगाजल पाइप लाइन डाली जा चुकी है। भोले की झाल से शहर को गंगाजल मिलता है। जल निगम की मानें तो 43 क्यूसेक गंगाजल मिल रहा है।
परियोजना का लेखाजोखा
कुल लागत : 341.30 करोड़
मुख्य लाइन : 21.04 किलोमीटर
डिस्ट्रीब्यूशन लाइन : 725 किलोमीटर में बिछाई गई।
गंगाजल शोधन प्लांट : भोला झाल पर
नगर निगम के जल संसाधन
-156 ट्यूबवेल
- 570 एस एचपी सबमर्सिबल
- 3 हजार वन एचपी सबमर्सिबल
- 10 हजार हैंडपंप
(नोट- नगर निगम के जल संसाधन ही गंगाजल के साथ छोड़ने के लिए बाद काम आएंगे। हालांकि इनमें भी 10 प्रतिशत हैंडपंप, तीन प्रतिशत ट्यूबवेल और तीन से चार प्रतिशत सबमर्सिबल खराब हैं।)
मजबूर है जल निगम
जल निगम के पास प्लांट के संचालन का बजट नहीं है। तीन-चार माह से कंपनी के अधिकारियों को समझाकर गंगाजल की सप्लाई करा रहे हैं। प्लांट के संचालन को हैंडओवर लेने के लिए नगर निगम को पत्र लिख चुके हैं। नगर निगम की तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। गंगाजल सप्लाई पर संकट से इनकार नहीं किया जा सकता है। गर्मी में गंगाजल की सप्लाई के लिए जल निगम गंभीर तो है लेकिन मजबूर भी है। भारत भूषण, अधिशासी अभियंता जल निगम
स्टाफ की कमी है
नगर निगम में एक जूनियर इंजीनियर, दो अधिशासी अभियंता हैं। ये पूरे शहर के हैंडपंप, सबमर्सिबल, ट्यूबवेल की देखरेख करते हैं। स्टाफ की कमी के कारण नगर निगम गंगाजल प्लांट को हैंडओवर लेने की स्थिति में नहीं है। गाजियाबाद या अन्य शहर जहां भी जेएनएनयूआरएम योजना में पाइप लाइन डाली गई हैं। वहां प्लांट का संचालन जल निगम ही कर रहा है। - संजीव रामचंद्र, महाप्रबंधक जल नगर निगम