फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: ग्रामीणों के धरने के बाद हरकत में आया विभाग, दो मिलों को नोटिस

विज्ञापन
मवाना रोड सैनी गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक करते क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद। स - फोटो : संवाद
विज्ञापन
मेरठ। ग्रामीणों के धरने बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में आ गया। सोमवार को मवाना रोड स्थित सैनी गांव में क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने ग्रामीणों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि दो मिलों को नोटिस भेजकर मिल परिसर से तत्काल एमएसडब्ल्यू (नगरीय ठोस अपशिष्ट) हटाने के आदेश दिए गए हैं। वहीं मुख्य पर्यावरण अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है।
विज्ञापन

सैनी और आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोग फैक्टरियों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहे हैं। बीते 2 जनवरी को ग्रामीणों ने एक पेपर मिल के गेट पर धरना दिया था। उस समय क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने 2 दिन में कार्रवाई का आश्वासन देकर धरना खत्म कराया था। सोमवार को समय सीमा पूरी होने पर राजेंद्र प्रसाद ने सैनी गांव में फ्लाईओवर के पास ग्रामीणों के साथ बैठक की।
वहां मौजूद मोहित मलिक, दीपक सिवाच, अमित, नितिन मलिक, सत्यवीर सिंह, विनय आदि ग्रामीणों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने दोनों मिल को भेजे गए नोटिस दिखाए। अधिकारियों ने बताया कि नोटिस के माध्यम से मिल परिसर में आरडीएफ के साथ मिले एमएसडब्ल्यू को तुरंत हटवाने के आदेश दिए गए हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में ईंधन के रूप में एमएसडब्ल्यू का प्रयोग मिला, तो सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन



ईंधन की गुणवत्ता जांचने की मांग

क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मुख्य पर्यावरण अधिकारी लखनऊ से अनुरोध किया गया है कि मेरठ की फैक्टरियों में आने वाले आरडीएफ ईंधन की गुणवत्ता की जांच उसके स्रोत (जहां यह बनता है) पर ही की जाए उसके बाद ही इसे यहां भेजा जाए। मेरठ कार्यालय से 10 पेपर मिलों को आरडीएफ के इस्तेमाल का अनापत्ति प्रमाण पत्र मिला हुआ है। ये मिलें बॉयलर को उच्चीकृत कर ईंधन के रूप में आरडीएफ का प्रयोग करती हैं। अधिकारियों का कहना है कि हर मिल में गुणवत्ता चेक करना कठिन है इसलिए प्रोसेसिंग प्लांट पर ही जांच होनी चाहिए। साथ ही मिलों को निर्देश दिया गया है कि वे बॉयलर की चिमनी से निकलने वाले धुएं की मॉनिटरिंग रिपोर्ट अधिकृत लैब से कराकर तुरंत कार्यालय में प्रस्तुत करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें