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नौकरी, स्कूल से छुट्टी कर लाइन में लगे लोग  

Wed, 16 Nov 2016 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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बैंक के बाहर लाइन में खड़े लोग। - फोटो : अमर उजाला
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सरकार के नोट बंदी के फैसले के बाद रुपये बदलवाने के लिए बैंकों में भीड़ लगी है। स्टूडेंटस, नौकरी पेशा ड्यूटी छोड़ने को मजबूर हैं। महिलाएं भूखे प्यासे बच्चे को गोद में लेकर बैंकों के बाहर बैठी हैं। नंबर कटने के डर से बच्चों को दूध पिलाने भी नहीं जा रही। कुछ लोग थकने पर दूसरे सदस्यों को लाइन में लगा रहे हैं। अमर उजाला टीम ने शहर का जायजा लिया तो ये हकीकत देखने को मिली।
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2:40 बजे दोपहर - केनरा बैंक, बागपत रोड
बागपत रोड केनरा बैंक के बाहर दोपहर 2.40 बजे लंच हो गया था। बैंक के बाहर सैकड़ों लोग कतार में थे। मलियाना निवासी सरिता देवी की गोद में बच्चा रो रहा था। पूछने पर बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे से यहां बैठी हूं। बच्चे को भूख लगी है। यदि इसे दूध पिलाने गई तो नंबर कट जाएगा। 

11:40 बजे पूर्वाह्न - ओबीसी ब्रांच, मलियाना
ओबीसी मलियाना ब्रांच के बाहर भीड़ थी। नई बस्ती की कृष्णा देवी, बिमला और प्रेमवती ने बताया कि पति मजदूरी करते हैं। मजदूरी के रुपयों से ही चूल्हा चलता है। घर का ताला लगाकर बच्चों के साथ नोट बदलवाने बैंक में आई है। वहीं कनोहर लाल डिग्री कॉलेज की छात्रा चांदनी ने बताया कि संडे को चार घंटे लाइन में लगे रहे, लेकिन नंबर नहीं आया। आज बैंक खुले तो उसे कॉलेज छोड़ना पड़ा। 
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कॉलेज भी छोड़ा फिर भी नहीं बदले नोट
बागपत रोड की ओबीसी ब्रांच में सुबह साढे़ नौ बजे लाइन में लगे वंश ने बताया कि वह 12वीं का स्टूडेंट है। शनिवार रविवार को पीएनबी और एसबीआई की ब्रांच के बाहर लाइन में लगा, लेकिन नंबर नहीं आया। आज कॉलेेज छोड़कर यहां लाइन में लगा हूं। बैंक वालोें ने कैश न होने की बात कहकर लौटा दिया है। वहीं बागपत रोड पीएनबी के बाहर लाइन में लगे नई बस्ती के विशाल ने बताया कि वह कनोहर लाल कालेज में 11वीं का छात्र है। कई दिन से रोज लाइन में लग रहा हूं, लेकिन नंबर नहीं आ रहा। अब तो किराए के लिए भी रुपये नहीं बचे।

नौकरी करें या लाइन में लगे 
दिल्ली रोड की यूनियन बैंक की ब्रांच के बाहर खडे़ प्राइवेट नौकरी करने वाले टीपी नगर के बीके तिवारी ने बताया कि वह बैंक से कैश निकालने आए थे, लेकिन कैश खत्म हो गया। खुले रुपये खत्म हो गए हैं अब घर के लिए आटा ,चीनी चावल के लिए भी रुपये नहीं है। अब समझ में नहीं आता कि नौकरी करें या बैंकों के बाहर लाइन में लगें। 

मेरा नंबर आने तक आ जाएंगे पापा
एसबीआई साबुन गोदाम के बाहर एक 10 साल का बच्चा लाइन में लगा था। बताया कि सुबह से पापा लाइन में लगे थे। खड़े खड़े तबीयत खराब हो गई है। वह मुझे लाइन में लगाकर घर गए हैं। जब तक मेरा नंबर आ जाएगा वह आ जाएंगे।  
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