अधिवक्ता ने शनिवार को फांसी लगाकर जान दे दी थी।सुसाइड नोट में हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक और एक ग्राम प्रधान पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। बताया गया कि अधिवक्ता का बेटा हाईकोर्ट में वकील है और उसका पत्नी से विवाद चल रहा है। इसी बात को लेकर दोनों में विधायक समझौता करा रहे थे।
अधिवक्ता की मौत के बाद गुस्साए वकीलों ने गंगानगर थाने में हंगामा किया। सुसाइड नोट के आधार पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की और विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद ही शव को उठने दिया था।
हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक को एफआईआर से बचाने के लिए कनेक्टिविटी के तार तक काट दिए। आठ घंटे तक पुलिस व अधिवक्ताओं के बीच खूब गहमागहमी हुई। यह मामला लखनऊ तक भी गूंज गया। अधिवक्ताओं ने फेसबुक, टि्वटर पर डीजीपी को इसकी जानकारी दी। काफी किरकिरी होने के बाद पुलिस ने भाजपा विधायक को नामजद करते हुए 15 खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
अधिवक्ता ओंकार सिंह तोमर की खुदकुशी करने की सूचना पर इंस्पेक्टर गंगानगर बिजेंद्र सिंह राणा 11 बजे ईशापुरम पहुंचे थे। ओमकार तोमर के पास मिले सुसाइड नोट में भाजपा विधायक दिनेश खटीक का नाम देखते ही पुलिस में खलबली मच गई।
पुलिस ने सबसे पहले सुसाइड नोट को सील कर दिया। यह जानकारी पुलिस अधिकारियों को मिली तो वह भी मामले को रफा-दफा करने में लग गए। अधिवक्ता की मौत के मामले में विधायक का नाम एफआइआर से कैसे बचाए। इसको लेकर खूब प्रयास भी हुए।