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फरहा फैज ने कहा- जिन शरई अदालतों में मौलाना को सजा नहीं हो सकती, वहां क्या जाना

Fri, 20 Jul 2018 11:37 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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फाइल फोटो
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सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फराह फैज ने कहा है कि बार-बार कहा जाता है कि शरई अदालतों में जाएं, लेकिन शरई अदालतों में मौलाना, मुफ्ती के लिए कोई सजा नहीं है। एक चैनल में डिबेट के दौरान उन पर जो हमला किया गया, यह घटना किसी शरई अदालत में होती तो क्या कोई पुलिस कार्रवाई की जाती। वहां न पुलिस कार्रवाई होती और न ही आरोपी पर ही कोई एक्शन लिया जाता। ऐसी शरई अदालतों में जाने का फायदा ही क्या है, जहां से कोई रिलीफ ही न मिल सके।  

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सहारनपुर के मंडी कोतवाली के मोहल्ला शाह बहलोल निवासी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने बुधवार को एक चैनल पर हुई डिबेट के दौरान मुफ्ती एजाज अरशद कासमी द्वारा की गई मारपीट के मामले को मुस्लिम महिलाओं पर बनाया जा रहा दबाव बताया। उन पर हो रहे हमले कहीं न कहीं दारुल उलूम की साजिश है। साजिद रसीदी और एजाज अरशद कासमी दोनों दारुल उलूम से जुड़े हुए हैं। 

उन्होंने कहा कि कासमी दारुल उलूम से ही पढ़ा हुआ है और पर्सनल लॉ बोर्ड का सदस्य है। 2016 में जिन्होंने उन पर अटैक किया था उन्हें भी उन्होंने देवबंद में देखा था। ये लोग तालीम का नाजायज फायदा उठा रहे हैं, उसका दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे लोगों की दुकानें बंद हो रही हैं, जिससे ये बौखला रहे हैं, लेकिन इन लोगों के हमले से न तो उनकी लड़ाई रुकेगी और न ही हौसला कम होगा। उनकी लड़ाई शरई अदालतों के खिलाफ चलती रहेगी।

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फाइल फोटो
फरहा ने कहा कि मुसलमानों के लिए अन्य कम्युनिटी की तरह ही कानून चाहिए। सिर्फ तीन तलाक के लिए ही नहीं, कंप्लीट फैमिली लॉ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कासमी जैसे लोग महिला विरोधी मानसिकता वाले लोग हैं। कासमी का काम फतवे देना है। जब ऐसी मानसिकता होगी तो महिलाओं के पक्ष में कभी फतवे नहीं मिल सकते, महिलाओं को कभी न्याय नहीं मिल सकता।

यह था मामला
फरहा फैज ने आरोप लगाया कि सुबह एक चैनल पर डिबेट के दौरान लक्ष्मीनगर दिल्ली निवासी एजाज अरशद कासमी ने अभद्रता की। शाम को फिर एक चैनल पर डिबेट हुई। जिसमें पहले से ही कासमी अभद्रता करने के लिए तैयार होकर आया था। आरोपी ने पहले तो डिबेट में मौजूद अंबर जैदी के साथ गाली गलौज एवं अभद्रता की। जिस पर वह रोने लगीं। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ भी ढोंगी, पाखंडी कहते हुए गाली देनी शुरू कर दी। उसने विरोध किया तो फिर गाली दी। बार-बार गाली दी तो बर्दाश्त के बाहर हो गया और उन्होंने आरोपी कासमी को चांटा मार दिया। जिस पर आरोपी ने उस पर हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की। जिस कारण उन्होंने पुलिस को सूचना दी। थाने में बैठकर जब वह तहरीर लिख रही थी तो साजिद रसीदी नाम का व्यक्ति पहुंचा और उसने थाना प्रभारी से उसे झूठी औरत बताया, उस पर दो नाम रखने का आरोप लगाया। साथ ही कासमी की भी एफआईआर दर्ज करने के लिए एसओ पर दबाव बनाया, लेकिन एसओ ने उसकी तहरीर पर एफआईआर दर्ज की और कासमी को कोर्ट में पेश किया।
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कोर्ट ने नहीं दी आरोपी को जमानत 
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट फरहा फैज ने बताया कि कोर्ट ने कासमी की जमानत को नामंजूर कर दिया है और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि लोग उसकी जमानत के प्रयास कर रहे हैं।

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