प्रधानमंत्री के सपनों की परियोजना रैपिड रेल में भी प्रशासन हीलाहवाली बरत रहा है। एक तरफ शहर में भैसाली बस अड्डे की वर्कशॉप रैपिड रेल की राह में रोड़ा बनी है तो दूसरी तरफ दौराला में रैपिड रेल के रखरखाव के लिए प्रशासन एक साल में जमीन तक नहीं तलाश पाया है। हाल यह है कि अब एनसीआरटीसी द्वारा सिर्फ दुहाई में ही डिपो बनाने की योजना बनाई जा रही है।
एनसीआरटीसी को दौराला में डिपो बनाने के लिए लगभग तीन हेक्टेयर से अधिक भूमि की जरूरत है। कई बार किसानों से इस पर वार्ता भी की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है। ऐसे में साफ है कि सरकारी विभाग भी प्रधानमंत्री की इस परियोजना में पलीता लगाने का काम रहे हैं।
वहीं, एनसीआरटीसी के अधिकारी कई बार जमीन के लिए प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर चुके हैं, मगर इसके बाद भी कोई हल नहीं निकल सका है। उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी अनिल ढींगरा के सामने डिपो की जमीन के लिए वार्ता की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका था। यही हाल अब है। ऐसे में डिपो नहीं बनने पर जहां रैपिड रेल के रखरखाव में परेशानी आएगी, वहीं परियोजना में भी देरी होगी।
तहसील को छोड़कर सब जगह जमीन के मामले अटके
सदर तहसील को छोड़कर सब जगह अभी जमीन के मामले हल नहीं हो सके हैं। हर बार कमिश्नर की अध्यक्षता में बैठक में जमीन की उपलब्धता पर चर्चा की जाती है, लेकिन अगली बैठक में स्थिति जस का तस रहती है।
ये हाल तो तब है जबकि एनसीआरटीसी ने शहर में रैपिड रेल निर्माण के लिए टेंडर फाइनल कर दिया है। ऐसे में अब एनसीआरटीसी जल्द निर्माण शुरू करने की तैयारी करने में लग गया है। इसके लिए लालकुर्ती सहित अन्य बाजार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से भी वार्ता चल रही है।