जिला पंचायत की बोर्ड बैठक को लेकर जबरदस्त शह-मात का खेल चल रहा है। एक तरफ जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास पर बैठक के खिलाफ विपक्षी सदस्य लामबंद हैं तो दूसरी तरफ नियमों का पाठ पढ़ाते हुए अध्यक्ष ने भी मोर्चा संभाल रखा है। शनिवार को भी बोर्ड बैठक के बहिष्कार के बाद विपक्ष इसके स्थगित होने के इंतजार में बैठा था। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष ने पूरी तैयारी के साथ बैठक को अंजाम तक पहुंचा दिया। यह बात अलग है कि इस बैठक में महज दो जिला पंचायत सदस्य और छह ब्लॉक प्रमुख ही मौजूद रहे। उधर, विपक्षी सदस्यों ने इस बैठक के विरोध में कोर्ट जाने की बात कही है।
जिला पंचायत की बोर्ड बैठक 17 सितंबर को भी अध्यक्ष के आवास पर बुलाई गई थी। लेकिन, इसमें महज एक सदस्य पहुंचा था। ऐसे में इसे स्थगित करते हुए 24 सितंबर को पुन: बैठक बुलाई गई। इस बार भी विपक्षी सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया। जबकि, नौचंदी मैदान स्थित जिला पंचायत अध्यक्ष के सरकारी आवास पर बैठक में भाग लेने के लिए जिला पंचायत सदस्य सुबोध गुर्जर और रीना के साथ ब्लॉक प्रमुख दौराला सचिन अहलावत, परीक्षितगढ़ के केपी सिंह, मवाना के प्रेम सिंह, सरूरपुर के हरेंद्र सिंह, जानी के अनिल कुमार और मेरठ के नितिन मौजूद रहे।
हालांकि, इनके बीच जिला पंचायत सदस्य डॉ. मनोज अधाना और रविंद्र सिंह के भी मौजूद होने का दावा किया गया, लेकिन वह बैठक पंडाल में नजर नहीं आए। इन आठ सदस्यों की मौजूदगी में बैठक की कार्यवाही शुरू करते हुए एएमए प्रदीप कुमार ने कहा कि आज की बैठक पुराने एजेंडे पर है। इसलिए नियमानुसार इसमें सदस्यों की गिनती नहीं की जाएगी और बैठक की कार्यवाही शुरू की जाती है।
पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि
एएमए ने पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि करते हुए कहा कि मखदूमपुर गंगा स्नान मेले के आयोजन के लिए कमेटी का गठन किया गया है। इसमें जिला पंचायत सदस्य कुलविंदर सिंह, डॉ. मनोज, रविंद्र और तनु को सदस्य बनाया गया है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2017-18 में 21 करोड़ रुपये के विकास कार्य होने हैं, जिसका प्रस्ताव सभी सदस्य 15 दिन के भीतर प्रस्तुत कर दें। इसके अलावा अनुरक्षण पर 25 फीसदी व्यय आदि के लिए पांच करोड़ की योजना स्वीकृत हुई। जिला पंचायत की संपत्तियों के रख-रखाव और सृजन पर पांच फीसदी व्यय के लिए एक करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई। जबकि, जिला पंचायत के अधीन सिविल निर्माण कार्यों के निर्माण के बार में 15 करोड़ की धनराशि सर्वसम्मति से स्वीकृत करने की बात कही गई।
6 माह पहले ही बनाई नौचंदी मेला समिति
नौचंदी मेला आयोजन में अभी करीब छह माह हैं। लेकिन, तब तक विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी, इसलिए बैठक में पहला प्रस्ताव नौचंदी मेले का ही तैयार किया गया। मेला आयोजन के लिए बनाई गई कमेटी में जिला पंचायत सदस्य डॉ. मनोज अधाना, अंजू, रविंद्र कुमार, मोहम्मद शफीक, शमशाद, मीनाक्षी भराला, कुलविंदर सिंह, नवाजिश और विनोद शामिल हैं।
जबकि, जिला पंचायत सदस्य तनु को अध्यक्ष के सहयोगी के तौर पर रखा गया है। एएमए ने बताया कि मेले के आयोजन को लेकर नगर निगम से जो विवाद चल रहा था, वह निस्तारित हो चुका है। निगम कोर्ट में हार चुका है और अब नौचंदी मैदान पर जिला पंचायत का हक रहेगा। ऐसे में दिल्ली हाट की तर्ज पर नौचंदी मेला मैदान का विकास होगा, ताकि दस माह तक इस स्थल का उपयोग हो सके। इसके लिए मंडलायुक्त के निर्देशन में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा।
न राय मांगी, न ही सदस्य बोले
बैठक में दो जिला पंचायत सदस्य और छह ब्लॉक प्रमुख मौजूद रहे। पूरी बैठक में सिर्फ एएमए ही बोलते रहे। उन्होंने सारे प्रस्ताव पढ़कर सुना दिए, जिस पर न किसी सदस्य ने कुछ कहा और न ही किसी की राय ली गई। एएमए के बोलते ही जिला पंचायत अध्यक्ष ने सबका धन्यवाद कर बैठक समापन की घोषणा कर दी।
विपक्षी बोले- बैठक नहीं, लोकतंत्र का मजाक
उधर, विपक्षी सदस्यों ने बोर्ड बैठक को लोकतंत्र का मजाक उड़ाने जैसा बताया। साथ ही इस बोर्ड बैठक समेत पूर्व में हुई बैठक का मुद्दा कोर्ट में ले जाने की बात कही। गंगानगर स्थित एक रेस्टोरेंट में विपक्षी सदस्यों की बैठक में भाजपा, बसपा और रालोद के सदस्य शामिल रहे। भाजपा नेता लोकेश प्रजापति की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिला पंचायत सदस्य रोहताश पहलवान, मुन्ना गिरि, नितिन खटीक, विक्की तनेजा, सतपाल सिंह, मुकेश चरला, जितेंद्र, ललित चौहान, अनुज वाल्मीकि, दिलशाद, साहिब आलम, तरुण कुमार, हेमलता, रजनी सोम, डॉ. मीनाक्षी भराला आदि मौजूद रहे।
सभी ने दावा किया कि उनके साथ अप्रत्यक्ष रूप से दूसरे सदस्य भी हैं। यही कारण है कि 34 में से जिला पंचायत के अध्यक्ष समेत मात्र तीन सदस्य ही बैठक में मौजूद रहे। बावजूद इसके गत बैठक की पुष्टि होना और इस बैठक के प्रस्ताव पास होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन भी इस पर चुप्पी साधे बैठा है। मंडलायुक्त से सिर्फ बैठक का स्थान परिवर्तन का अनुरोध किया गया था, लेकिन प्रशासन ने इस पर भी कोई सुनवाई नहीं की। अब इस मामले को कोर्ट ले जाया जाएगा।