मेरठ। श्राद्ध खत्म होने के बाद शुक्रवार से अधिकमास शुरू हो गया है। यह 16 अक्तूबर तक चलेगा और 17 अक्तूबर से नवरात्र शुरू हो जाएंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल अश्विन मास में अधिकमास है। इस साल दो अश्विन मास होंगे। इसमें नवरात्र एवं दशहरा मनाया जाएगा। प्रत्येक तीन साल में एक बार अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है। इसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्मपरायण जनता इस मास में पूजा-पाठ, भगवत भक्ति, व्रत-उपवास, जप भजन कीर्तन और योग आदि धार्मिक में लगी रहती है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलोजिकल साइंसेज के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का अन्य माह से कई सौ गुना अधिक फल मिलता है।
इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्त होते ही अधिकमास लग गया है। इससे नवरात्र और पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जाएगा। अश्विन मास में मलमास लगना और एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होना। ऐसा संयोग कई साल बाद होगा। इस साल दो आश्विन मास होंगे।
अधिकमास का वैज्ञानिक कारण
एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब छह घंटे का होता है। जबकि, एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिन का अंतर होता है। आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि यह अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अधिकमास का नाम दिया गया है।
मलमास कहने का आधार
अधिकमास में सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। इसी कारण हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी शुभ मुहूर्त आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं।
किस प्रकार करें धर्म आध्यात्म से जुड़े कार्य
अधिकमास में हिंदू श्रद्धालु उपवास, पूजा-पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को दैनिक जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन, श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योतर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, अधिकमास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को स्वयं भगवान विष्णु शुभ आशीर्वाद देते हैं ।