झूला खरीद अधिशासी अभियंता नीना सिंह, सहायक अभियंता राजपाल यादव और अवर अभियंता राजेंद्र सिंह ने की थी। जांच के आधार पर तीनों को दोषी मानते हुए डॉ अरविंद चौरसिया ने तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की थी। इस मामले में शासन ने तीनों पर गाज गिराते हुए नगर विकास विभाग लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। साथ ही मामले की जांच अपर आयुक्त प्रशासन को सौंप दी है।
अपर मुख्य सचिव नगर विकास डॉ रजनीश दूबे का इस संबंध में जारी किया पत्र नगर निगम पहुंच गया है। नगर आयुक्त मनीष बंसल ने बताया कि झूला घोटाले में शासन ने तीनों आरोपी अभियंताओं पर कार्रवाई की है। मामले की जांच अपर आयुक्त प्रशासन को सौंपी है। जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
92 लाख रुपये का हो चुका भुगतान
शहर के विभिन्न पार्कों में लगाए गए 231 झूलों की खरीद प्रति झूला 84 हजार से अधिक में की गई है। श्जबकि बाजार मूल्य 44 हजार के आसपास मिला था। 231 झूलों में से 110 झूलों का करीब 92 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। 121 झूलों का एक करोड़ एक लाख 74 हजार 164 रुपये का भुगतान होना बाकी है।
चहेते ठेकेदार को दिय गया था ठेका
झूला लगाने वाली फर्म अक्षय एसोसिएट्स निगम अधिकारियों और अभियंताओं की चहेती फर्म रही है। कुछ समय पूर्व तक निगम के अधिकतर ठेके इसी फर्म को दिए जाते रहे हैं। कान्हा उपवन से लेकर झूला और अन्य कार्य भी इसी फर्म ने किए थे। अब इस फर्म का यह पहला घोटाला सामने आया है।
विजिलेंस भी कर रही मामले की जांच
सीएम के निर्देश पर झूला प्रकरण की जांच विजिलेंस भी कर रही है। काफी दिन तक विजिलेंस टीम को निगम अधिकारियों ने घोटाले की फाइल ही मुहैया नहीं कराई थी। एसपी विजिलेंस ने मुख्य अभियंता निर्माण को पत्र भेजकर इस संबंध में चार सवाल पूछे थे। बाद में दबाव बनने के बाद कुछ सवालों के जवाब देते हुए पत्रावली उपलब्ध कराई थी।