दिल्ली रोड रानी मिल में आयोजित सभा में जैन मुनि ने दिया धर्मलाभ
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जैन मुनि सौम्य सागर ने कहा कि ध्यान के माध्यम से मनुष्य हर प्रकार की उपलब्धि और आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है। 0ध्यान का अर्थ केवल आंखें बंद करके जप करना नहीं, अपनी चेतना का विकास करना और आत्मा में स्थित होना है।
दिल्ली रोड रानी मिल में आयोजित धर्मसभा में मुनि ने कहा कि आज के समय में भीड़, मोबाइल फोन और अनगिनत विचार मनुष्य के भीतर शोर पैदा करते हैं। सच्चा ध्यान इन बाहरी आवाजों को शांत कर आत्मा के स्वर को सुनने का नाम है। उन्होंने कहा कि आत्मा में ठहर जाना ही वास्तविक ध्यान है।
मुनि ने कहा कि मनुष्य को प्रतिदिन यह संकल्प लेना चाहिए कि आज से राग-द्वेष को कम करुंगा। उन्होंने अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा ध्यान दुनिया से दूर जाना नहीं है, यह तो स्वयं तक पहुंचने का मार्ग है। दुनिया से भागो मत। अपने वास्तविक स्वरूप में लौट आओ। उन्होंने कहा कि ध्यान के माध्यम से व्यक्ति स्वयं की मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास कर सकता है। आत्मिक उपचार भी इसी से संभव है।
सौम्य सागर ने आहार के पश्चात अरुणोदय से सूर्यनगर तक विहार किया। शाम को वह मनोज्ञधाम पहुंचे। प्रवचन के दौरान संजय जैन, वीरेंद्र जैन, प्रवक्ता सुनील जैन, अनिल चेतन आदि बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग रहे।