शहर में आज से ट्रैफिक पुलिस का यातायात माह शुरू होने जा रहा है। सड़क हादसों को रोकने के लिए पुलिस जागरूकता रैली से शुभारंभ कर हेलमेट पहनकर दो पहिया वाहन चलाने का निर्देश भी देगी। लेकिन हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सड़के खूनी हो रही हैं।
शहर में न तो सड़कें सुरक्षित हैं और न ही चौराहे। हाईवे पर तो पता नहीं कब भारी वाहन मौत बनकर दौड़ जाएं। पिछले नौ माह में जिले की सड़कों पर 317 लोगों की मौत हो चुकी है। हर साल होने वाली मौत के आंकड़े ट्रैफिक पुलिस के जागरूकता अभियान को पीछे छोड़ देतेे हैं। दो पहिया वाहनों पर जरूर यह माना जाता है कि हेलमेट से सुरक्षित सफर है। लेकिन जब भारी वाहन किसी दो पहिया वाहन को कुचलते हैं तो फिर हेलमेट भी कमजोर पड़ जाता है।
इन स्थानों पर जाती रही हैं जान
दिल्ली रोड पर परतापुर तिराहा, कंकरखेड़ा बाईपास, मोदीपुरम तिराहा और दौराला फ्लाईओवर। दौराला फ्लाईओवर के पास तो चार दिन के अंदर दिल्ली के दो परिवारों की जान चली गई। फ्लाईओवर के ऊपर से हाईवे पर कार मुजफ्फरनगर की ओर जाती है, तो नीचे से ट्रक आकर हाईवे पर चढ़ते हैं। दौराला थाने के पास इस कट पर कभी पुलिस ने कोई व्यवस्था नहीं की। इसी साल दस से ज्याद लोगों की मौत इसी एक ही प्वाइंट पर हो चुकी है। दिल्ली रोड पर मंडी गेट, हापुड़ अड्डा, कमिश्नरी आवास चौराहा, जेल चुंगी चौराहा, तेजगढ़ी, पीवीएस रोड, शास्त्रीनगर एल ब्लॉक मुख्य स्थान हैं। मवाना रोड पर फिटकरी पुलिया स्थित कट और कसेरू बक्सर, रजपुरा पुलिस चौकी के पास भी हादसे ज्यादा होते हैं।
भारी वाहन हैं जिम्मेदार
शहर में नो एंट्री का समय सुबह छह बजे से रात्रि दस बजे तक रहता है। बेगमपुल चौराहा, रेलवे रोड चौराहा, हापुड़ अड्डा, गांधी आश्रम चौराहा चार प्रमुख चौराहे हैं जहां दिन में नो एंट्री रहती है। लेकिन शहर के नौ चौराहों से होकर दिन में भी भारी वाहन निकलते हैं। दिन में 800 से एक हजार भारी वाहन निकलते हैं। जिन चौराहों पर भारी वाहनों से हादसे होते हैं उनमें जीरो माइल, कमिश्नरी आवास चौराहा, जेलचुंगी, तेजगढ़ी, पीवीएस रोड, एल ब्लॉक शास्त्रीनगर, मंडी गेट, दिल्ली चुंगी और बागपत अड्डा तिराहा शामिल हैं।
शास्त्रीनगर की घटना से भी नहीं जागा सिस्टम
शास्त्रीनगर में पीवीएस रोड तीन माह पहले ट्रक से छात्रा की कुचलकर मौत हो गई थी। इतना दर्दनाक हादसा था कि छात्रा का शरीर दो भागों में अलग हो चुका था। हादसे में छात्रा के दादा की भी जान चली गई थी। सोशल मीडिया पर हादसे की वीडियो वायरल हुई। लेकिन आज भी यहां भारी वाहन जमकर दौड़ते हैं।
वर्ष सड़क दुघर्टना मृतकों की संख्या घायलों की संख्या
2013 651 366 647
2014 771 292 642
2015 691 271 679
2016 748 312 623
2017 784 317 635
(यह आंकड़े ट्रैफिक पुलिस के अनुसार एक जनवरी से 30 सितंबर तक के हैं)
यातायात माह में लोगों को जागरूक करने के साथ उन्हें ट्रैफिक के नियम भी बताए जाएंगे। ट्रैफिक पुलिस अपनी तरफ से कोशिश करती है कि नियमों का पालन होना चाहिए। कुछ स्थानों पर भारी वाहनों की समस्या है उसमें जल्द सुधार किया जाएगा। संजीव वाजपेयी, एसपी ट्रैफिक