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दुर्घटना मुआवजों में पेंच फंसा रहा पीवीवीएनएल 

Sat, 29 Apr 2017 11:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं के मामले में सीएम आदित्यनाथ योगी ने 21 दिन के अंदर जांच पूरी कर पीड़ितों को मुआवजा देने के आदेश दिए है। लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी मामलों में पेंच फंसाने से बाज नहीं आ रहे हैं। आदेश के बाद हुए हादसों की जांच में तो तेजी दिखाई जा रही है, लेकिन महीनों से पेंडिंग पड़े कई मामलों में मुआवजा लटकाकर रखा है। मामलों की जांच तो दूर उल्टे पीड़ितों को ही दोषी ठहराकर लाइन शिफ्ट करने के लिए पैसा जमा कराने के नोटिस भेजे जा रहे हैं। 
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बिजली की लाइनों के चलते फसल आगजनी, मानव व पशु दुर्घटनाएं आम बात है। सरकार ने इनके होने पर पीड़ित को मुआवजे का प्रावधान किया है। लेकिन बिजली विभाग अपनी तिजोरी से मुआवजा राशि निकालने में पीड़ितों को नाकों चने चबवा देता है। थक हारकर पीड़ित बिना मुआवजे के ही घर बैठ जाता है। कई मामलों में तो मुआवजा नुकसान से बेहद कम होता है। इस संबंध में लोगों की शिकायतों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बिजली से हुए नुकसान की जांच कर 21 दिन के अंदर पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। आदेश मिलने के बाद से पीवीवीएनएल अधिकारी हरकत में आए हैं। ऊर्जा भवन से मिली जानकारी के अनुसार गत 11 अप्रैल तक मेरठ जोन में छह, गौतमबुद्धनगर में पांच, गाजियाबाद जोन में दो, मुरादाबाद जोन में शून्य और सहारनपुर जोन में आठ अग्निकांड समेत कुल 21 दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें से गाजियाबाद की दोनों घटनाओं में और मेरठ जोन के बागपत में हुई चार घटनाओं का मुआवजा दे दिया गया हैं। लेकिन सहारनपुर जोन की घटनाओं का मुआवजा नहीं दिया गया है। मेरठ में भी दो घटनाओं का मुआवजा जांच में लटका है। 

पचास फीसदी केसों में ही दिया जा रहा मुआवजा 
बिजली के चलते फसल, बाग में आग लगने, करंट की चपेट में आकर मानव व पशु के घायल होने या मौत होने के करीब पचास फीसदी मामलों में ही मुआवजा दिया जा रहा है। पश्चिमांचल में वर्ष 2014-15 में 269, वर्ष 2015-16 में 255 और वर्ष 2016-17 में 219 मामलों समेत तीन साल में कुल 743 घटनाएं हुई। इनमें से करीब पचास फीसदी मामलों में मुआवजा दिया गया। बाकी मामलों में फाइल चक्कर काटकर बंद हो गई। 
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