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आखिर पुलिस के सामने ऐसी क्या मजबूरी थी

Mon, 16 May 2016 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जिला पंचायत कार्यालय के बाहर हंगामा - फोटो : अमर उजाला
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 बोर्ड बैठक के बवाल में पुलिस के उच्चाधिकारी जांच के बाद आरोपियों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं। लेकिन घटनास्थल की हकीकत कुछ ओर बयां कर रही थी। पूरे मामले में पुलिस और प्रशासनिक अफसर सत्ताधारी पक्ष के दबाव में साफ दिखाई दे रहे थे। अफसरों की खामोशी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बवाल के बाद भी अफसर यह कहते रहे कि हमारे सामने तो कुछ हुआ ही नहीं है।
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जिला पंचायत कार्यालय में बोर्ड बैठक को लेकर पुलिस को बवाल का अंदेशा पहले से ही था। जिसको देखते हुए खुद इंस्पेक्टर नौचंदी हरशरण शर्मा फोर्स के साथ मौजूद थे। लेकिन सत्ताधारी नेताओं और एएमए ने एक बार भी पुलिस से बाहरी लोगों को रोकने के लिए नहीं कहा। जब पुलिस ने इसका विरोध किया तो वहां मौजूद अफसरों ने कह दिया कि यह दर्शक दीर्घा बनी हुई है। टेंट लगाकर जो आयोजन किया जा रहा है, उसमें दर्शक जुटने ही हैं।
मामला इतना बिगड़ा कि सपा से जुड़े लोग अंदर घुस गये और पुलिस तमाशबीन बनी रही। विपक्षी सदस्यों के सवाल शुरू करते ही बवाल शुरू हुआ तो यह पुलिस के लिए मुसीबत बन गया। इंस्पेक्टर नौचंदी तो हंगामा कर रहे लोगों से जूझते दिखाई पड़े, लेकिन सिपाही से लेकर दरोगा और अन्य पुलिस कर्मियों ने बवालियों के सामने कदम खींच लिए। यहां तक कि एक दरोगा तो हाथ जोड़कर गुहार लगाने लगा।
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इसे दबाव कहें या खतरा
इससे सत्ता का दबाव कहें या फिर पुलिस को अपनी वर्दी उतरने का खतरा। मामला चाहे कुछ भी हो, लेकिन पुलिस के आगे ऐसी कौन सी मजबूरी थी। जिस कारण पुलिस खामोश बनकर खड़ी रही। इंस्पेक्टर नौचंदी बवालियों को खदेड़ने में लगे तो सपाईयों ने वर्दी उतरवाने की धमकी दे दी। इंस्पेक्टर को धक्कामुक्की के साथ धमकी मिलती देख सिपाही से लेकर दरोगा बैकफुट पर आ गए। पुलिस यदि सख्ती से निपटती तो शायद मामला इतना न बढ़ता।

कुलविंदर ने अतुल समेत पांच के खिलाफ दी तहरीर
मेरठ। जिला पंचायत कार्यालय में शनिवार को हुए बवाल के मामले में भाजपा नेता और जिपं सदस्य कुलविंदर सिंह ने नौचंदी थाने में सपा नेता अतुल प्रधान, एएमए प्रदीप कुमार, राजदीप विकल, अनुज जावला, संजय विकल और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ नौचंदी थाने में तहरीर दी है। जिसमें कुलविंदर ने आरोप लगाया है कि उसके साथ मारपीट और धमकी दी गई है। यह एएमए और अतुल के इशारे पर किया गया है। जिसमें कुलविंदर ने जान का भी खतरा जताया है। सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार का कहना है कि उन्हें तहरीर मिली है। जिसमें जांच की जा रही है जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।


जिपं बोर्ड का बवाल बढ़ा सकती है रंजिश  
जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में शनिवार को हुए बवाल से सियासी संघर्ष के साथ व्यक्तिगत रंजिश से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। जिस तरह से विपक्षी सदस्यों को टारगेट कर हमला बोला गया, उससे यह मामला संवेदनशील हो गया है। इस घटना के बाद कुलविंदर सिंह की काजीपुर स्थित ससुराल में पंचायत हुई। पंचायत में इस बवाल को लेकर गहरी नाराजगी नजर आयी, जिसके बाद से खुफिया तंत्र भी सतर्क हो गया है।
जिला पंचायत बोर्ड की बैठकों में हंगामा होता रहा है। 2010 के जिला पंचायत बोर्ड को छोड़ दें तो बाकी सभी बोर्ड बैठकों में हंगामे हुए हैं। लेकिन बाहरी लोगों ने कभी बोर्ड बैठक में हंगामा नहीं काटा। शनिवार को हुई बोर्ड बैठक पूरी तरह जंग का अखाड़ा बन गयी। जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों ने नहीं, बल्कि बाहरी लोगों ने हंगामा काटा। बैठक में जो भी विपक्षी सदस्य बोलने के लिए खड़ा हुआ, उसे ही इन युवकों ने निशाने पर ले लिया। शर्मनाक बात ये रही कि इसमें महिला सदस्यों तक को नहीं बख्शा गया।
इन सबके बीच जिला पंचायत अध्यक्ष पद के भाजपा से दावेदार रहे सदस्य कुलविंदर सिंह पर बैठक का बहिष्कार करके बाहर आते समय हमला बोला गया। जिसमें उन्हें बचाने के फेर में दूसरे सदस्य रोहताश पहलवान घायल भी हुए। इस घटना को लेकर पनपा आक्रोश अब रंजिश बढ़ा सकता है। कुलविंदर सिंह दिल्ली रहते हैं, जबकि उनकी ससुराल मूलरूप से काजीपुर में हैं। इस घटना के बाद काजीपुर में तुरंत ही पंचायत हुई। सूत्रों की मानें तो पंचायत में घटना को लेकर भारी आक्रोश नजर आया। जिसमें भविष्य में इस घटना की प्रतिक्रिया तक देने की बात युवकों ने कर डाली। हालांकि कुछ बुजुर्गों ने उन्हें शांत किया।
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