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आबूलेन के बराबर हुआ शोप्रिक्स मॉल

Thu, 07 Jul 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 जिलाधिकारी द्वारा इस बार सर्किल रेट को लेकर दिल्ली रोड पर सबसे ज्यादा कवायद की गयी है। हालांकि रेट पांच से दस प्रतिशत ही बढ़ाने की बात प्रस्तावित सर्किल रेट में सामने आ रही है। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी दिल्ली रोड पर ही नजर आ रही है। इसी बढ़ोत्तरी का कारण है कि शहर का दिल कहे जाने वाले आबूलेन बाजार का सर्किल रेट शॉप्रिक्स मॉल के बराबर हो गया है।
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जिलाधिकारी ने वर्ष 2016-17 के प्रस्तावित सर्किल रेट जारी किये हैं। जिसमें पूरे जनपद में पांच से दस प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी नजर आ रही है। इस सर्किल रेट में व्यावसायिक संपत्तियों पर अगर नजर डालें तो अब तक आबूलेन सबसे महंगा हुआ करता था। लेकिन इस बार दिल्ली रोड स्थित शॉप्रिक्स मॉल आबूलेन के बराबर जा पहुंचा है। प्रस्तावित सर्किल रेट में आबूलेन का रेट जहां 1.05 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है तो शॉप्रिक्स मॉल का सर्किल रेट भी 1.04 प्रति वर्ग मीटर जा पहुंचा है।
जबकि दिल्ली रोड के पास ही स्थित सरस्वती लोक कॉलोनी में अप्रत्याशित रुप से सर्किल रेट चालीस प्रतिशत तक की वृद्धि सीमा में आ रहा है। सरस्वती लोक फेज वन का वर्तमान सर्किल रेट 12 हजार है तो प्रस्तावित रेट 15 हजार किया जा रहा है। जबकि फेज टू में 10 हजार से रेट बढ़ाकर 14 हजार किया जा रहा है।
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पांच साल में बढ़ गए चार सौ गुना रेट
जनपद में सर्किल रेट में हर साल वृद्धि हो रही है। पिछले पांच वर्षों के सर्किल रेट में हुई बढ़ोत्तरी पर नजर डालें तो तो इसमें 400 प्रतिशत तक वृद्धि हो चुकी है। पांच साल पहले जिस श्रद्धापुरी के रेट पांच हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर थे। उसके रेट अब 22 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक जा पहुंचे हैं।

सर्किल रेट से कम पर जमीन उपलब्ध
जिला प्रशासन द्वारा सर्किल रेट में अंधाधुंध वृद्धि का ही परिणाम है कि किला रोड पर ज्ञानपुर के पास जिस जमीन का सर्किल रेट 2400 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, उस जमीन को वहां पर 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर में कॉलोनी काटकर और रास्ता बनाकर बेचा जा रहा है।

उत्तराखंड और हरियाणा की तरह घटाएं जाएं रेट
 सर्किल रेट में लगातार हो रही वृद्धि से बिल्डर और दस्तावेज लेखक खासे परेशान हैं। क्योंकि बिल्डरों के प्रोजेक्ट जहां धड़ाम हो रहे हैं, वहीं रजिस्ट्री न होने से दस्तावेज लेखकों का रोजगार भी ठप हो गया है। कलक्ट्रेट के वरिष्ठ दस्तावेज लेखक अरुण शर्मा के अनुसार इस समय पूरे देश में प्रॉपर्टी 25 प्रतिशत डाउन है। बावजूद इसके मेरठ में सर्किल रेट बढ़ाये जा रहे हैं। इसका ही परिणाम है कि यहां लक्ष्य के विपरीत मात्र 66 प्रतिशत ही स्टांप एवं निबंधन शुल्क की प्राप्ति इस बार हुई है।
दस्तावेज लेखकों ने बुधवार को एडीएम (वित्त एवं राजस्व) गौरव वर्मा से मुलाकात की। उन्होंने उत्तराखंड और हरियाणा का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पर सर्किल रेट बढ़ाये नहीं बल्कि घटाये गये हैं। समाचार पत्रों की कटिंग दिखाते हुए दस्तावेज लेखकों ने बताया कि हरियाणा में गुड़गांव जैसे शहर में 15 प्रतिशत तक सर्कि ल रेट कम किया गया है। जबकि उत्तराखंड में तो 25 प्रतिशत से 49 प्रतिशत तक सर्किल रेट डाउन हुआ है। दस्तावेज लेखकों ने मांग रखी कि जिस तरह मेरठ में रजिस्ट्री लगभग बंद हो रही है। उसे देखते हुए यहां भी सर्किल रेट बढ़ाने के बजाये इन्हें 15 से 25 प्रतिशत कम किया जाये।
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