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मां को नहीं मिला आतंकी आबिद में अपना प्रवीण   

Mon, 18 Jul 2016 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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आबिद की फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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जैश-ए-मोहम्मद के सजायाफ्ता पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद आबिद की शक्ल अपने लापता बेटे प्रवीण कुमार से मिलने की बात कहकर उसे अपना बेटा और भाई बताते वाले मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी महेश देवी और पवन कुमार ने जेल में आबिद से मुलाकात की।
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एसटीएफ, एटीएस, एलआईयू समेत कई संस्थाओं और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस मुलाकात में दोनों ने आबिद से कई सवाल-जवाब किए । उसके शरीर के निशान, बातचीत के लहजे के अलावा पारिवारिक बातें पूछीं। करीब आधा घंटा मुलाकात के बाद जेल से बाहर आई महेश देवी ने बताया कि उसकी कलाई पर गोदा गया प्रवीण नाम आबिद के हाथ पर नहीं था। माथे और पैरों पर चोट के निशान भी मेल नहीं खा रहे थे। चेहरे पर तिल के निशान आबिद की दाढ़ी में छिपे थे। उसकी कुछ आदतें और बोलचाल का तरीका जरूर प्रवीण से मिलता था। ऐसे में उन्हें उसके प्रवीण होने पर 50-50 का शक है। संतुष्टि के लिए वह उसका डीएनए टेस्ट कराने के लिए हाईकोर्ट जाएंगे। सीएम से मिलकर भी इसकी गुहार लगाएंगे। मुलाकात के दौरान रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मोहम्मद शुएब सहित जेल, एसटीएफ, एटीएफ और कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। 

आतंकी आबिद बोला, मैं प्रवीण नहीं पाकिस्तानी हूं  
इस मुलाकात की दो अहम बातें रही। एक परिवार जहां एक आतंकी में अपना बेटा खोज रहा था तो वहीं आतंकी आबिद ने साफ कह दिया कि मैं प्रवीण नहीं पाकिस्तानी हूं। 
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जेल में मुलाकात के बाद प्रवीण के भाई पवन ने कहा कि वे जानते हैं कि आबिद देश में आतंक फैलाने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में उम्र कैद काट रहा है। अगर वह जेल में खुद को प्रवीण बताता, तब भी वह वे डीएनए टेस्ट की

मांग जरूर करते। वह नहीं चाहते कि किसी तरह का कोई शक या संदेह इसमें रहे। डीएनए टेस्ट के लिए वह हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देंगे। 
वहीं, महेश देवी और पवन ने खुद बताया कि आबिद बेहद सरल ढंग से बात कर रहा था। आबिद ने उन्हें पहचानने से ही साफ इंकार कर दिया। उसने कहा कि आप मेरे परिजन नहीं हो। उसका परिवार पाकिस्तान में है। वह हिंदुस्तानी नहीं, पाकिस्तानी है। महेश देवी ने रोते हुए कहा कि आबिद के शरीर पर वह निशान नही थे, जो प्रवीण के शरीर पर थे।

किसी दबाव में तो नहीं था आबिद :शोएब 
महेश देवी और पवन के साथ जेल में आबिद से मिलने गए रिहाई मंच संस्था के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कई तथ्य देकर बताया कि बातचीत के दौरान उसके बोलने का तरीका भी वेस्ट यूपी के लोगों जैसा ही था। मेडिकल साइंस में हाथ पर गोदे गए शब्द को हटाना भी ज्यादा मुश्किल काम नहीं है। उनका कहना था कि जेल में मुलाकात के दौरान जेल ,एटीएस, एसटीएफ के अधिकारी और भारी सुरक्षा रही। ऐसे में संभव है कि उनके दबाव में आबिद सच नहीं बता सका हो। 
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पवन = तू मेरा भाई है पहचान क्यों नहीं रहा? 
आबिद - मुस्कुराकर ,भाई मैं तेरा भाई नहीं हूं, तुझे गलत फहमी हुई है। 
पवन - ( प्रवीण की फोटो दिखाकर)  ये देख भाई। 
आबिद - पहले मेरी भी फोटो ऐसी ही आती थी, लेकिन ये मै नहीं हूं। 
पवन - तुम्हारे कितने भाई हैं ?
आबिद - तीन 
पवन - मेरे भी तीन भाई हैं भाई। 
आबिद - अच्छा।
पवन - भाईयों में तुम कौन से नंबर के हो? 
आबिद = सबसे बड़ा 
पवन -प्रवीण भी सबसे बड़ा था भाई। कुछ याद कर? 

छलक गए आंसू
महेश देवी ने आबिद के माथे पर चोट का निशान देखा। वह प्रवीण की चोट से कुछ छोटा था। उसने आबिद से कलाई पर गुदा नाम दिखाने को कहा तो आबिद ने कलाई दिखा दी। लेकिन कलाई पर कुछ नहीं लिखा था। ये देख महेश देवी के आंसू छलक गए। उन्होंने अनमने मन से मान लिया कि वह प्रवीण नहीं है। आबिद के पैरों में भी निशान थे। लेकिन वह साफ कहता रहा कि वह प्रवीण नहीं है।

मम्मी क्या हुआ, कब आएंगे पापा 
शक्ल के आधार पर आबिद को प्रवीण होने की संभावना जता रहे कंकरखेड़ा के न्यू गोविंदपुरी निवासी परिवार की निगाहें दिन भर लखनऊ पर थी। 
सबको उत्सुकता थी कि लखनऊ जेल में बंद आबिद मुलाकात के दौरान महेश देवी और पवन कुमार को क्या बताता है? क्या वह खुद को प्रवीण बताएगा? इस बात को लेकर परिवार के सदस्यों में बेचैनी थी। वह बार-बार लखनऊ पवन को फोन कर जानकारी ले रहे थे। जेल में मुलाकात के बाद वहां से जो जानकारी मिली, उससे परिजनों को थोड़ी मायूसी जरूर हुई लेकिन उन्हें उम्मीद है कि प्रवीण जरूर लौटेगा। 

प्रवीण की पत्नी प्रभा ने बताया कि जेल में बंद आबिद का डीएनए टेस्ट जरूर कराया जाना चाहिए। इसके लिए मैं कोर्ट से लेकर मुख्यमंत्री तक जाऊं गी। इसके बाद ही उसकी शंका दूर होगी। उन्हें ईश्वर पर पूरा भरोसा है कि उनके पति एक दिन जरूर लौटेंगे। बहन प्रियंका और भाई शेखर को भी प्रवीण के लौटने की पूरी उम्मीद है। प्रवीण का बेटा अंशुल बार-बार मम्मी से पूछता रहा कि मम्मी क्या पता चला पापा का? लखनऊ में पापा मिले या नहीं? वह कब आएंगे? उसके सवाल सुनकर परिजनों का कलेजा भी भर आया।

..तो कहां गया प्रवीण ?
लोगों में यह भी चर्चा है कि यदि जेल में बंद प्रवीण नहीं आबिद ही है तो फिर प्रवीण कहां है? मई 2006 से लापता प्रवीण आखिर गया कहां? पांच मई 2006 को दिल्ली के खजूरी खास में हुई पुलिस मुठभेड़ के दौरान पहले यही बताया गया था कि मुठभेड़ में प्रवीण मारा गया। लेकिन जब परिजन वहां गए तो पुलिस ने बताया कि प्रवीण भाग गया। तब से आज तक उसका कोई पता नहीं है। 
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