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जनसुविधा केंद्रों से सुविधाएं ‘गुल’ 

Mon, 18 Jul 2016 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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परीक्षितगढ़ में खुला जनसुविधा केंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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जनता की सुविधा के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के तहत खोले गए जनसुविधा और लोकवाणी केंद्रों पर लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। आय, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र को छोड़ दें तो अन्य सुविधाएं गुल सी हो गई हैं। कई विभाग तो ऐसे हैं, जिन्होंने आज तक जनसुविधा केंद्रों से भेजे गये आवेदनों को खोलकर तक नहीं देखा है। यह हाल तो तब है जब यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल है। अमर उजाला ने जब इसकी पड़ताल की तो इन सुविधा केंद्रों पर आ रही असुविधा का पूरा सच सामने आया।
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ये हैं जनसुविधा और लोकवाणी केंद्र 
जनसुविधा के तहत शासन ने लोकवाणी केंद्र स्थापित किये थे। ये लोकवाणी केंद्र शहरी क्षेत्र में खोले गये थे, जहां पर तहसील से बनने वाले प्रमाण पत्रों के साथ ही जनशिकायतों की सुविधा प्रदान की गई थी। बाद में इसका विस्तार करते हुए सरकार ने जनसुविधा केंद्र खोले। इन जनसुविधा केंद्रों पर सेवा को विस्तार देते हुए आठ विभाग जिसमें राजस्व, विकलांग कल्याण विभाग, विकास भवन, समाज कल्याण, स्थानीय निकाय, महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग, पेंशन विभाग, पंचायती राज विभाग के साथ ही लेबर, खाद्य एवं आपूर्ति, प्रशिक्षण एवं रोजगार विभाग, लोक शिकायत, वाणिज्य कर और फूड एवं ड्रग विभाग को भी इससे जोड़ा था। इन विभागों की योजनाएं, प्रमाण पत्र, शिकायत, आवेदन आदि ऑनलाइन करने की सुविधा दी गई थी। इसके लिए एक सप्ताह से 15 दिन के भीतर निस्तारण का निर्देश शासन से था। मेरठ जनपद में इस समय 409 जनसुविधा और 50 लोकवाणी केंद्र संचालित हैं। 

आवेदन तक नहीं खुल रहे 
इन विभागों में अगर राजस्व विभाग अर्थात तहसीलों द्वारा आय, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र को छोड़ दिया जाए तो बाकी विभाग पूरी तरह इसके प्रति लापरवाह बने हुए हैं। सबसे ज्यादा समस्या जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के लेकर आ रही है। नगर निगम जहां इन जनसुविधा केंद्रों से आने वाले आवेदन पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है तो नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायत स्तर से भी यही समस्या आ रही है। कहीं से भी जनसुविधा या लोकवाणी केंद्र के माध्यम से भेजे जाने वाले जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं। 
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एक साल से फॉर्म पड़े हैं लंबित
इमलियान में चल रहे केंद्र के संचालक नायब आलम, ढबाई नगर के शमशाद, अहमदनगर के मोहम्मद दानिश और विकास पुरी के कुंवर अजमत अली के साथ ही परीक्षितगढ़ की वंदना का कहना है कि उनके यहां आय, जाति और मूल निवास के प्रमाण पत्रों का निस्तारण तो एक सप्ताह से दस दिन के बीच हो रहा है। लेकिन जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र का निस्तारण पिछले एक साल से नहीं हुआ है। आवेदन करने वाले से वो लोग शुल्क ले लेते हैं और जब निस्तारण नहीं होता तो वह उनसे सवाल पूछते हैं। केंद्रों पर इस कारण झगड़े की स्थिति बनी रहती है। 

इन विभागों से नहीं सुनवाई 
सबसे ज्यादा विकलांग, विधवा और वृद्धावस्था पेंशन के आवेदन आते हैं। इसके बाद गरीब शादी अनुदान के लिए भी आवेदन आते हैं, लेकिन इनका कोई निस्तारण नहीं होता है। इसके अलावा वाणिज्य कर विभाग, फूड एंड ड्रग विभाग से लाइसेंस आदि के आवेदन भी कभी कभी आते हैं, लेकिन उनका भी निस्तारण इन जनसुविधा केंद्रों के जरिये नहीं होता है। इसके अलावा यदि लोक शिकायत विभाग पर कोई शिकायत दर्ज कराई जाती है तो उसका समाधान या निस्तारण भी नहीं हो रहा है। 

शुल्क भी है समस्या
जनसेवा केंद्रों को सेवा शुल्क के तौर पर 20 रुपये लेने का प्रावधान है। 17 रुपये डीएसपी द्वारा काट लिये जाते हैं और केंद्र संचालक को मात्र 3 रुपये मिलते हैं। इसमें भी केंद्र संचालक कम से कम 5 कागज स्कैन करता है और दो कागज प्रिंट करता है। इसके अलावा इंटरनेट का शुल्क व अन्य खर्च अलग से होते हैं। जिसमें उसे मिलने वाले तीन रुपयों से पूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में अधिकांश केंद्र संचालकों को मजबूरन चालीस से पचास रुपये लेने पड़ रहे हैं। 
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