राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य राजकुमार चौधरी ने कहा है कि किशोर संप्रेक्षण गृह घनी आबादी के बीच नहीं चलना चाहिए।
इससे यहां रहने वाले लोगों को तो परेशानी हो ही रही है, बालकों को भी सही माहौल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इसका यहां से शिफ्ट होना जरूरी है। इसके लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
बृहस्पतिवार को सूरजकुंड स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) पहुंचे आयोग के सदस्य राजकुमार चौधरी ने कहा कि यहां हुए बवाल को गंभीरता से लेते हुए आयोग की अध्यक्षा जूही सिंह ने जांच के निर्देश दिए, जिस पर वह यहां आए हैं।
किशोरों से मैंने गहनता से वार्ता की। किशोरों ने कई शिकायतों को मेरे समक्ष रखा। जिस पर किशोरों को आश्वस्त किया गया है कि आयोग उनके साथ है और उनकी प्रत्येक जायज समस्या का समाधान किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि संप्रेक्षण गृह में दो अध्यापकों की व्यवस्था जल्द करने तथा प्रशिक्षण दिलाए जाने के लिए प्रयास होगा। साथ ही उनके केसों की पैरवी प्रभावी ढंग से कराने, परिजनों से मुलाकात समय से कराने, मनोरंजक के साधन उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
इस दौरान निदेशक महिला कल्याण आरपी श्रीवास्तव, अधीक्षक संप्रेक्षण गृह मिथलेश कुमार, उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी आशुतोष कुमार सिंह, एसीएम ज्योंति राय, डीपीओ गाजियाबाद बिजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
स्थानीय लोगों की एक ही मांग
मेरठ। किशोर संप्रेक्षण गृह के आसपास के रहने वाले लोगों ने पुरजोर मांग की है कि संप्रेक्षण गृह को यहां से शिफ्ट किया जाए। स्थानीय लोगों ने कहा कि किशोरों को इसी भवन में ऊपर से नीचे शिफ्ट करने से कोई लाभ नहीं होगा।
पूर्व में हुए कई ऐसे मामले रहे हैं, जिनसे पुलिस-प्रशासन को सबक लेना चाहिए। बवाल के बाद अफसर तो लंबे चौड़े दावे कर चले जाते हैं, लेकिन इन किशोरों की हठधर्मिता को तो हमें ही झेलना पड़ता है।