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किसानों को गन्ना पर्ची और बकाया भुगतान कराए सरकार

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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से किसानों में खुशी की लहर
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मेरठ। किसानों के गन्ना मूल्य निर्धारण में राज्य सरकार के अधिकार को वैध ठहराने वाले सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले से किसानों में खुशी की लहर है। सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश किसानों को गन्ने का उचित मूल्य दिलाने के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा। यह बात रालोद के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ राजकुमार सांगवान ने कही।
उन्होंने कहा कि अब प्रदेश सरकार किसानों को 14 दिन के अंदर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान मय ब्याज कराने का इंतजाम सुनिश्चित करें। अब सर्वोच्च न्यायालय के बाद चीनी मिलें और सरकार गन्ना मूल्य भुगतान में कोई बहाना नहीं कर सकती। मध्यम वर्गीय किसानों के सामने ओवरलोड में काटी गई पर्चियों के कारण पर्ची खत्म होने से संकट खड़ा हो गया है। उनका अतिरिक्त पर्चियों के लिए एग्रीमेंट नहीं किया गया।
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सांगवान ने कहा कि गन्ना समिति और चीनी मिल किसानों का शोषण करने में लगे हैं। जिला गन्ना अधिकारी को लॉकडाउन के कारण किसानों के प्रति गंभीर नहीं हैं। गन्ना माफिया किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर कम मूल्य पर गन्ना खरीद रहे हैं। 14वें दिन गन्ना भुगतान कराने का दावा करने वाले गन्ना मंत्री का अब कहीं अता-पता नहीं है। उन्होंने सीएम से अनुरोध किया कि गन्ना किसानों की पर्ची और बकाया गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने के लिए जिलाधिकारियों की जवाबदेही तय करें।
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गेहूं खरीद केंद्रों पर 20 रुपये काटे जाने की शिकायत
डॉ. सांगवान का कहना है कि गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों से 20 रुपये लेबर चार्ज काटे जाने की शिकायत मिल रही है। इससे किसानों में भारी रोष है। डीएम से अनुरोध है कि इस पर संज्ञान लेते हुए किसानों को शोषण से बचाएं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें।
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