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भाजपा में खींचतान का दौर.. मुखर हुए असंतोष के बोल

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मेरठ। भाजपा में इस समय असंतोष की लहर चल रही है। हालात ये हैं कि एक महानगर मंत्री जहां इस्तीफा दे चुके हैं, तो बाकी के वरिष्ठ नेता जो महानगर कार्यकारिणी पदाधिकारी हैं, खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। यही स्थिति जिले में भी हैं। यहां भी कार्यकर्ता तमाम सरकारी दफ्तरों में सुनवाई न होने को लेकर परेशान हैं। ऐसे में फिलहाल पंचायत चुनाव और आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।
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भाजपा में इस समय कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ जहां जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी खींचतान किसी से छिपी नहीं है, तो दूसरी तरफ संगठन स्तर पर भी खींचतान जारी है। महानगर की स्थिति ये है कि दो, तीन पदाधिकारी ही महानगर स्तर पर पार्टी को मुख्य रुप से संचालित कर रहे हैं। इसमें अहम बात ये है कि कार्यकारिणी में तमाम वरिष्ठ नेता भी हैं, लेकिन इस समय वह कहीं न कहीं हाशिये पर सिमटे हुए हैं।
करीब तीन माह पहले हुई संगठनात्मक बैठक में महानगर के पदाधिकारी ने खुले तौर पर वरिष्ठ नेताओं के सामने बोला था कि पार्टी में अब ठेकेदारी शुरू हो गई है। तमाम ऐसे लोग शामिल हो चुके हैं, जिनका मकसद सिर्फ नगर निगम, मेडिकल सहित अन्य विभागों में ठेका लेना है। ये लोग ही पार्टी को संचालित कर रहे हैं और वरिष्ठ व पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में पिछले दिनों महानगर मंत्री अरविंद जाटव ने फेसबुक पर अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। जिसको आधार मानते हुए महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने उसे स्वीकार भी कर लिया। यह मामला इस समय पूरे महानगर में चर्चा का विषय बना है।
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जिले में भी नहीं है हालात ठीक
जिला इकाई में हालात ठीक नहीं है। जिला महामंत्र इंद्रपाल बजरंगी के खिलाफ कंकरखेड़ा पुलिस ने तस्करा डाल दिया। लेकिन पार्टी नेतृत्व कुछ नहीं कर पाया। देहात के तमाम कार्यकर्ता लगातार उपेक्षा का रोना रो रहे हैं। लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
महानगर में हालात और ज्यादा खराब
महानगर की स्थिति ये है कि भाजपा से मुख्य रूप से व्यापारी तबका जुड़ा है। लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान व्यापारी ही सबसे ज्यादा उत्पीड़न का शिकार हो रहा है। किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है। तमाम भाजपा नेता अपने से वरिष्ठ नेताओं के यहां गुहार लगाते घूम रहे हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
चुनावी तैयारियों पर पड़ेगा असर
भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता इस समय निराश हैं। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि इसका परिणाम निश्चित रूप से चुनाव में नजर आएगा। क्योंकि संगठन में जो लोग जुड़े हैं, वह सिर्फ अपना व्यक्तिगत हित देख रहे हैं। इनमें कई तो विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की तैयारी में अभी से जुटे हैं। जिस कारण खुद को ही आगे रखते हुए बाकी की उपेक्षा में लगे हैं।
क्षेत्रीय अध्यक्ष पर नाम तय, घोषणा की औपचारिकता बाकी
भाजपा के प्रांतीय नेतृत्व ने पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष का नाम तय कर दिया है। वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार वर्तमान अध्यक्ष अश्वनी त्यागी और महामंत्री मोहित बेनीवाल के नाम ही अंतिम दौर में पहुंचे हैं। जिसमें संगठन के पुराने वह स्थानीय लोग जहां अश्वनी त्यागी की पैरवी कर रहे हैं, तो कुछ लोग मोहित बेनीवाल की पैरवी में है। इन दोनों में से ही एक नाम लगभग तय हो चुका है, जिसकी घोषणा शुक्रवार या शनिवार तक होने की बात कही जा रही है। इसके बाद उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी।
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