सीसीएसयू : ऑनलाइन होंगी मौखिक परीक्षाएं
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि की परीक्षा समिति की बैठक में कैंपस और संबद्ध कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की मौखिक-प्रैक्टिकल परीक्षाएं ऑनलाइन कराने का निर्णय लिया गया है। इसमें कॉलेजों को छात्र छात्राओं की सहमति भी लेनी होगी। इसके अलावा काल बाधित श्रेणी में आने वाले छात्र-छात्राएं अतिरिक्त शुल्क जमाकर डिग्री पूरी कर सकते हैं। एमबीबीएस प्रकरण और प्रस्तावित परीक्षाओं के लिए भी समिति बना दी गई है।
बृहस्पतिवार को कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा की अध्यक्षता में परीक्षा समिति की ऑनलाइन बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि विषम सेमेस्टर की दिसंबर 2019 में जिन विषयों की परीक्षाओं की तिथि घोषित हो गई थी, लेकिन कोविड-19 के कारण परीक्षाएं नहीं हो पाई थीं। ऐसे में जो छात्र छात्राएं लिखित परीक्षा में शामिल हुए थे, उनकी सहमति लेकर जल्द से जल्द ऑनलाइन मौखिक परीक्षाएं करा ली जाएं। इसके अलावा यूजी-पीजी के कोर्सों में जो छात्र छात्राएं जून 2020 में सम सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने थे और उनकी डिग्री पूरी करने का एक वर्ष काल बाधित हो गया है। ऐसे छात्र 5000 रुपये अतिरिक्त शुल्क जमा करने के बाद डिग्री पूरी करने के लिए परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। दो साल काल बाधित वाले 10000 रुपये फीस जमा कर परीक्षा में बैठ सकते हैं।
एमबीबीएस प्रकरण में 12 छात्रों का रिजल्ट निरस्त करते हुए पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति रिजल्ट जारी करने में उप कुलसचिव अरुण कुमार यादव एवं अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच करेगी। प्रति कुलपति की अध्यक्षता में बनी इस समिति में एक न्यायिक अधिकारी और एक सदस्य कुलपति ने नामित किया है। इसके अलावा पांच बीएड कॉलेजों के मामले में आंतरिक अंक अपलोड किए जाने के संबंध में एक दिन पोर्टल खोलने का निर्णय लिया गया। यूजी और पीजी में 13 अगस्त से प्रस्तावित फाइनल ईयर की परीक्षाओं को कराने के लिए विवि ने छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति प्रोन्नत किए जाने वाले छात्र-छात्राओं पर भी निर्णय लेगी। वहीं परीक्षा फार्म भरवाए जाने से लेकर सारा रिजल्ट जारी करने तक एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति कर्मचारियों और अधिकारियों का दायित्व निर्धारित करेगी।
कोर्ट के फैसले पर आज रहेगी नजर
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को परीक्षाएं कराए जाने को लेकर याचिका पर सुनवाई होनी है। याचिका में परीक्षाओं का विरोध किया गया है। विवि प्रशासन की इस पर भी नजर लगी हुई है।