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मेरठ में हंगामेदार रही जिला पंचायत की चौथी बोर्ड बैठक, 67 प्रस्ताव निरस्त

Wed, 31 May 2017 12:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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बैठक में बोलती पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान
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मेरठ में जिला पंचायत की चौथी बोर्ड बैठक हंगामेदार रही। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान के खिलाफ सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया। तय हुआ कि पिछले साल स्वीकृत 67 कार्यों को क्षेत्रीय सदस्य की सहमति पर निरस्त किया जायेगा। वहीं छह नियुक्तियों की भी जांच होगी। बैठक में पिछले प्रस्ताव निरस्त और नियुक्तियों पर जांच का मामला आते ही पूर्व अध्यक्ष सीमा प्रधान बैठक छोड़कर चली गईं।
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जिला पंचायत बोर्ड की मंगलवार को विकास भवन में आयोजित बैठक दो वजह से खास थी। एक तो बैठक छह माह बाद हो रही थी, दूसरे जिला पंचायत अध्यक्ष के इस्तीफा देने के बाद बैठक की अध्यक्षता प्रशासक बनाए गए डीएम समीर वर्मा कर रहे थे। बैठक को लेकर जैसा ‘अमर उजाला’ ने अंदेशा जताया था, वैसा ही हुआ। बैठक शुरू होते ही एजेंडे में शामिल पूर्व बैठक की पुष्टि को लेकर शुरू में ही हंगामा खड़ा हो गया। सदस्यों ने कहा कि जब उस बैठक का कोरम पूरा हुए बगैर ही प्रस्ताव पारित कर दिए गए तो पुष्टि कैसे की जाएगी। इसके बाद सदस्य पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल के कामों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे।

संगीत सोम ने संभाली कमान, सीमा प्रधान ने किया बहिष्कार

बैठक में सांसद, विधायक और डीएम मौजूद
बैठक में गत वित्तीय वर्ष के कामों का एएमए ने ब्यौरा देना शुरू किया, जिस पर सदस्यों ने एतराज जताया। लेकिन प्रशासक ने सदस्यों को चुप कर दिया। इस बीच जिपं. सदस्य सपना हुड्डा ने कुछ विकास कार्यों और उनके टेंडर पर सवाल उठाते हुए निरस्त करने की मांग उठा दी। इसके बाद विधायक संगीत सोम ने सीधे एएमए से संवाद करते हुए कहा कि 67 सड़कें ऐसी हैं जिनका प्रस्ताव पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कुछ सड़कों को गिनाना शुरू कर दिया। संगीत सोम ने कहा कि ये वो सड़कें हैं जिनका बजट 10 लाख से ज्यादा है, जिसका अधिकार जिला पंचायत के पास नहीं है। इसके बाद संगीत सोम लगातार तेवर में आते गए और बैठक में इन 67 प्रस्तावों से 5-6 को छोड़कर बाकी सभी निरस्त होने का प्रस्ताव आ गया। जिस पर सीमा प्रधान सत्ता के दबाव में बैठक होने की बात कहते हुए बैठक से चली गईं।

वहीं जिलाधिकारी को ज्ञापन देने गये सपाइयों ने अब नया मुद्दा खड़ा कर दिया। उनका आरोप है कि ज्ञापन देने गए विधायक और एमएलसी से डीएम ने बैठे-बैठे ज्ञापन लिया। जबकि प्रोटोकाल के तहत उन्हें खड़े होकर ज्ञापन लेना चाहिए था। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकार का हनन किया है। उन्होंने मामले को विधानसभा और विधान परिषद में उठाने की बात कही है।
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बैठक में बोलती पूर्व जिला अध्यक्ष सीमा प्रधान
इससे पहले सोमवार को सपा जिलाध्यक्ष चौ. राजपाल सिंह के नेतृत्व में सपाई प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर डीएम को ज्ञापन सौंपने गये थे। राज्यपाल को संबोधित इस ज्ञापन को देने वालों में शहर विधायक रफीक अंसारी, एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल, पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद, पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान सहित करीब 40 कार्यकर्ता शामिल थे। 

जिलाध्यक्ष राजपाल का आरोप है कि सभी ने डीएम को खड़े होकर ज्ञापन दिया, लेकिन वह बैठे रहे। इस पर उन्होंने डीएम से कहा कि विधायक और एमएलसी का प्रोटोकाल मुख्य सचिव से बड़ा होता है, इसलिए वह खड़े होकर ज्ञापन लें। लेकिन डीएम ने उनकी बात अनसुनी कर दी। जो कि जनप्रतिनिधियों का अपमान है और उन पर विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। राजपाल सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को सपा विधायक और एमएलसी अपने सदनों में उठाएंगे। 

जिलाधिकारी, मेरठ समीर वर्मा का कहना है कि यदि सांसद, विधायक, एमएलसी मुझसे मिलने आते तो निश्चित रूप से प्रोटोकाल बनता है। लेकिन वह भीड़ के साथ नारेबाजी करते हुए कार्यालय में घुसे और ज्ञापन दिया। ऐसे में उनकी भूमिका बदली हुई थी। इसमें प्रोटोकाल का मामला नहीं बनता है।


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