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गंगा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, लगाई आस्था की डुबकी

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मखदुमपुर गंगा घाट पर गंगा दशहरे के अवसर पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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हस्तिनापुर। गंगा दशहरे के अवसर पर क्षेत्र के मखदूमपुर घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की और इसके बाद घाट पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई, लेकिन टूटी सड़कों और अव्यवस्था ने उन्हें परेशान किया। धूल भरे रास्तों से भक्तों को गंगा घाट तक पहुंचने के लिए चार किलोमीटर का मुश्किलों भरा सफर पैदल तय करना पड़ा।
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गंगा दशहरे के अवसर पर क्षेत्र के मखदूमपुर घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सूरज की पहली किरण के साथ ही यहां हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और पवित्र जल से तन-मन को शुद्ध किया। परिवार संग आए भक्तों ने पिंडदान और पूजा-अर्चना की। इस वर्ष गंगा दशहरे पर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बने। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और व्यतिपात योग का एक साथ आना कई दशकों बाद हुआ है। इस कारण गंगा स्नान, दान, जप, तप और व्रत का विशेष फल मिलने की मान्यता रही।
बुधवार को जिलाधिकारी डाॅ. वीके सिंह ने गंगा घाट पहुंचकर दो दिवसीय मेले का उद्घाटन किया था। इसके साथ ही गंगा किनारे श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जैसे ही रात के 12 बजे तो श्रद्धालुओं का गंगा में स्नान करने का सिलसिला शुरू हो गया और सूर्य की पहली किरण तक यह सिलसिला लाखों की संख्या में पहुंच गया। गंगा किनारे पहुंचे श्रद्धालुओं ने पहले पतित पावनी गंगा की विधिविधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद स्नान कर मोक्ष की कामना कर परिवार की खुशहाली की मन्नत मांगी।
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रेतीला रास्ता, धूप और धूल फिर भी हौसला नहीं टूटा

गंगा घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब चार किलोमीटर का उबड़-खाबड़, धूल भरा रास्ता पार तय करना पड़ा। बाइक और छोटे वाहन रास्ते में धंस गए। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे तेज धूप में पैदल चलते दिखे, फिर भी किसी ने शिकायत नहीं की। जिस मंजिल को पाने के लिए उन्होंने धूल भरे रास्ते और गहरे गड्ढाें से गुजरते हुए रास्ता तय किया और गंगा किनारे पहुंचकर पूजा-अर्चना की।


व्यवस्थाएं रहीं अधूरी
बुधवार को जिलाधिकारी द्वारा मेले का उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन मेला स्थल तक पहुंचने के रास्ते को दुरुस्त नहीं कराया गया। श्रद्धालुओं को गड्ढों, धूल और रेत से भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। कई लोगों को बच्चों को गोद में उठाकर घाट तक लाना पड़ा। समय कम होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी गंगा घाट तक जाने वाले रास्ते को दुरुस्त नहीं कर पाए क्योंकि इसी रास्ते पर कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले का आयोजन किया गया था उसे समय यह रास्ते जिला पंचायत द्वारा तैयार किए गए थे।


एक ही घाट पर मुंडन और मोक्ष के लिए संस्कार
मान्यता है कि इसी दिन गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी और गंगा में स्नान करने के बाद गंगा किनारे पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके मोक्ष की कामना के लिए पूजा-अर्चना की गई। घाट पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन संस्कार कराए तो वहीं अनेक लोगों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। गंगा किनारे बैठे पंडितों को श्रद्धालुओं ने दान-दक्षिणा दी। महिलाओं ने भी पारंपरिक लोकगीतों के साथ गंगा पूजन किया।

गहरे पानी में जाने से रोकती रही पुलिस
गंगा घाट पर श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए कई गोताखोर और नाव लगाई गई थी। जिसमें थाना पुलिस के जवान तैनात थे। थाना प्रभारी राम प्रकाश शर्मा भी बीच-बीच में गश्त कर श्रद्धालुओं से किनारे पर स्नान करने की अपील कर रहे थे। शाम को गंगा दशहरे का मेला सकुशल संपन्न हुआ। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।


ट्रैक्टर-ट्राॅली ही गंगा घाट तक पहुंचाने का सहारा
सुबह के समय स्नान के लिए गंगा घाट पर पहुंचने और स्नान के बाद गंगा क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। वहीं, धूल से बचने के लिए श्रद्धालु एक-दूसरे से आगे दौड़ते नजर आए। गंगा घाट तक पहुंचाने के लिए श्रद्धालुओं की कार और बाइक धंसी रही। वहीं ट्रैक्टर-ट्राॅली और बैल गाड़ी गंगा घाट तक पहुंचाने के लिए एकमात्र सहारा था।

मखदुमपुर गंगा घाट पर गंगा दशहरे के अवसर पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत संवाद

मखदुमपुर गंगा घाट पर गंगा दशहरे के अवसर पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत संवाद

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