कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 34वां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 34वें दिन मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि संकल्पविहीन वाणी दीमक लगे वृक्ष के समान है। जो बाहर से तो खड़ा हुआ है परंतु भीतर खोखला है। जिस प्रकार नदी की रक्षा तट से होती है उसी प्रकार जीवन की रक्षा संयम और नियम से होगी।
मुनि ने कहा कि तुम्हारे पास से यदि धन चला गया तो कुछ भी नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ चला गया, परंतु चरित्र चला गया तो समझ लेना सब कुछ चला गया। चरित्रहीन व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है। मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए भी नियम होते हैं उसे धारण किए बिना कल्याण संभव नहीं है।
इससे पूर्व विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। स्वर्ण कलश से सुशील जैन, राकेश जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा आकाश पुजारी व आशीष पुजारी ने की। दीप का प्रज्ज्वलन ब्रजबाला जैन और सविता जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
देव-शास्त्र-गुरु एवं आदिनाथ भगवान की पूजा और सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 98 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ राकेश जैन, रेखा जैन ने किया।
विधान का विसर्जन महिला मंडल पंजाब द्वारा किया गया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन वीरेंद्र जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन विनोद जैन, रेखा जैन, राकेश जैन और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन जैन महिला मंडल द्वारा किया गया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, राजीव जैन, राजीव जैन, सुनील जैन, आदीश्वर प्रसाद जैन, अनिल कुमार जैन का सहयोग रहा।
कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर