राशन कार्ड बनाते समय हो रहा है खेल
राशन कार्ड बनाते समय घोटाले की नींव रखी जा रही है। उदाहरण के लिए अगर तीन सदस्यों वाले परिवार की मुखिया राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन करती है, पूर्ति विभाग से सत्यापन के बाद जारी राशन कार्ड में परिवार के तीन सदस्य नहीं बल्कि दो से तीन गुना अधिक संख्या मिलती है। कार्ड में अधिक सदस्यों के नाम अंकित मिलने पर कार्ड धारक शिकायत भी करते हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जनपद में चार लाख 70 हजार राशन कार्ड धारक हैं। इनमें से अगर दस प्रतिशत राशन कार्डों में भी फर्जीवाड़ा किया गया है तो पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर राशन घोटाला किया जा रहा है।
कार्ड धारक को उतना ही मिलता है राशन
सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर बायोमेट्रिक मशीनें लगी हैं। जिनपर परिवार के मुखिया या अन्य सदस्य जिनके आधार कार्ड लिंक हैं, वह मशीन पर अंगूठा लगाते हैं तब उनके राशन वितरण की पर्ची निकलती है। परिवार को तो तीन सदस्यों के हिसाब से ही राशन मिल रहा है, कार्ड में शामिल बाकी सदस्यों का राशन कौन खाता है? इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। एक राशन कार्ड आईडी नंबर पर शामिल कोई भी व्यक्ति पंच कर दे तो कार्ड में शामिल सभी सदस्यों के नाम से राशन निकल जाता है।
दूसरे प्रदेश के लोग तो राशन कार्ड में शामिल नहीं
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि राशन कार्डों में एक परिवार के साथ अन्य बाहरी लोगों के नाम उप्र के नहीं बल्कि दूसरे प्रदेश के शामिल किए जा रहे हैं। क्योंकि प्रदेश के लोगों के नाम सामने आने पर पकड़े भी जा सकते हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि पश्चिम उप्र के मुकाबले इस तरह से फर्जीवाड़े की स्थिति पूर्वांचल में अधिक है।
राशन कार्ड में फर्जीवाड़ा कर जोड़े जा रहे दो से तीन गुना अधिक लोग
पूर्व में हो चुका है राशन घोटाला
चार साल पहले जनपद में राशन घोटाला हुआ था। जिसकी जांच एसआईटी कर रही है। जिसमें आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की गर्दन फंस रही है। जांच में अभी तक सामने आया है कि मेरठ में 120 आधार कार्डों से 27 हजार लोगों का राशन गलत तरीके से निकाला गया। आधार कार्ड बनाने वाली कंपनी का सहयोग नहीं मिलने से अधिकांश मुकदमों की विवेचना अटकी है। इस घोटाले का खुलासा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की शिकायत पर हुआ था। पूरे प्रदेश में जांच हुई, बड़ा खुलासा हुआ।
इस तरह मिलता है राशन
राशन कार्ड में प्रत्येक एक यूनिट के हिसाब से राशन मिलता है। यानी एक व्यक्ति के नाम यानी एक यूनिट पर तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल दिया जाना निर्धारित किया गया है।
डीएम अनिल ढींगरा का कहना है कि अगर ऐसा है तो बड़ा मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला पूर्ति अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि हमने पिछले माह ही मेरठ का चार्ज संभाला है। अभी हमारे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। अगर राशन कार्ड में फर्जी नाम जोड़े गए हैं, तो बड़ा मामला है। एक एक राशन कार्ड की जांच कराएंगे। फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो कार्रवाई भी होगी।
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