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50 करोड़ ने रोका गंगाजल

Fri, 05 Dec 2014 05:30 AM IST
Meerut
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मेरठ। 50 करोड़ रुपये न मिलने से गंगाजल अटक गया है। सिंचाई विभाग ने पानी देने से पहले जल निगम से यह रकम मांगी है। जल निगम ने बजट बनाकर शासन को भेज दिया है। लेकिन तीन महीने बाद भी शासन ने बजट पास नहीं किया है। इससे 341 करोड़ की योजना को पलीता लग गया है।
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शहर से पानी का संकट दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने जेएनएनयूआरएम योजना शुरू की थी। इसके लिए 341 करोड़ का बजट बनाया गया। योजना में कुछ अंश राज्य सरकार का भी था। जलनिगम ने तीन साल पहले योजना पर काम शुरू किया। इस अवधि में शहर की सूरत बिगाड़ दी गई। कोई ऐसी सड़क नहीं छोड़ी जो खोदी नहीं गई हो। इनमें से कुछ सड़कें बना दी गईं, जबकि कुछ अभी भी टूटी हुई हैं। जारी बजट में जलनिगम 98 प्रतिशत काम पूरा करने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत में अभी बहुत काम बाकी है। दो दर्जन से अधिक स्थानों पर तो पाइप लाइन तक नहीं जोड़ी गई है। इस योजना की समय सीमा कब की पूरी हो चुकी है, लेकिन महानगर की साढ़े 15 लाख आबादी को अभी तक गंगाजल की एक बूंद तक नहीं मिली है। सिंचाई विभाग ने पानी देने के जल निगम से पहले 100 करोड़ रुपये मांगे थे। बाद में 50 करोड़ पर बात बन गई। लेकिन यह पैसा भी सूबे की सरकार ने अभी तक जारी नहीं किया है। जलनिगम भी बजट न मिलने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।

भोला झाल पर नहर होगी पक्की
सिंचाई विभाग ने जल निगम से 50 करोड़ रुपये नहर को पक्का करने के लिए मांगे हैं। विभाग का तर्क है कि अगर भोला की झाल पर नहर पक्की नहीं की गई तो इसके टूटने का खतरा बना रहेगा। इस पैसे से कई अन्य जरूरी कार्य भी किए जाएंगे।
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जेएनएनयूआरएम योजना के तहत हुए कार्य
जल निगम ने बनाई ट्यूबवेल : 57
जलाशय बनाए : 31
भोले की झाल पर डब्लूटीपी -100 एमएलडी क्षमता
मुख्य पाइप लाइन : 17.80 किमी
डिस्ट्रीब्यूशन लाइन : 759 किमी
पंपिंग लाइन : 14 किमी
फीडर लाइन : 21 किमी

पाइप लाइन का कार्य 98 प्रतिशत पूरा हो चुका है। कुछ स्थानों पर जोड़ इसलिए छोड़े गए हैं, ताकी टेस्टिंग के समय दिक्कत न हो। अगर सिंचाई विभाग कल गंगाजल देने को तैयार हो जाए तो हम पाइप लाइन से पानी लेने को तैयार हैं। सिंचाई विभाग ने 50 करोड़ की मांग की है। प्रस्ताव शासन में लंबित है।
एसके जैन, परियोजना प्रबंधक, जल निगम

तीन साल से गंगाजल मिलने की बात सुनते चले आ रहे हैं। पाइप लाइन डालते समय सड़कें टूटने से भी जनता परेशान रही। बाजारों का व्यापार प्रभावित रहा। सरकार को धन जारी करके जनता को गंगाजल उपलब्ध कराना चाहिए। - नीरज मित्तल, अध्यक्ष कंकरखेड़ा व्यापार संघ

शासन जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। पाइप लाइन पर करोड़ों रुपये खर्च होने की बाद भी गंगाजल नहीं मिल सका है। - सुदेश राणा, रामनगर

हैंडपंपों का पानी खराब आ रहा है। पानी की टंकी भी जगह-जगह लीकेज है। अब जरूरी है कि शीघ्र महानगर की जनता को गंगाजल मिले, ताकी बीमारियों से भी बचा जा सके। - कुलदीप चौधरी, जटौली

आए दिन सुनने को मिलता है कि गंगाजल से जनता की प्यास बुझेगी। लेकिन कब मिलेगा यह कभी स्पष्ट नहीं होता। गृहणी होने के नाते पानी की दिक्कत हमें ही पता है। - प्रीति, ब्रह्मपुरी

कहने को हम एमडीए की कॉलोनी में रहते हैं। लेकिन पानी की स्थिति बेहद खराब है। गंगाजल मिलने की बात सुनते हैं तो अच्छा लगता है, लेकिन कब मिलेगा इसकी जानकारी नहीं है। - मनोज शर्मा, पल्लवपुरम

वैसे तो सरकार जनता को सभी सुविधाएं देने का राग अलापती है। लेकिन गंगाजल योजना के लिए धन नहीं दिया जा रहा है। सरकार को उपलब्धियां गिनाने से पहले महानगर की जनता को गंगाजल उपलब्ध कराना चाहिए।
रवि चौधरी, पल्लवपुरम

सुनते रहते हैं कि गंगाजल मिलने से पानी की समस्या खत्म होगी। लेकिन कब मिलेगा यह कोई स्पष्ट करने को तैयार नहीं है। अगर सरकार को धन देना ही है तो दे देना चाहिए। - योगेश जैन, साकेत

शासन और प्रशासन मिलकर जनता को धोखा दे रहे हैं। एक साल पहले मिलने वाला गंगाजल अभी तक नसीब नहीं हुआ है। गर्मी आने से पहले गंगाजल को लेकर शासन व प्रशासन को गंभीर होना चाहिए। - करन, कंकरखेड़ा
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