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प्रॉपर्टी डीलर की गोलियां बरसाकर हत्या

Tue, 28 Oct 2014 05:32 AM IST
Meerut
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मेरठ। ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में लिसाड़ी रोड पर सोमवार दोपहर बाइक सवार बदमाशों ने प्रापर्टी डीलर एवं मीट व्यापारी की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। जबकि बाइक पर साथ आ रहे परिचित होमगार्ड तथा घटनास्थल के पास खड़े एक युवक को भी गोली लगी। हत्या पुरानी रंजिश में की गई। चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। नामजदों में सगा साला भी शामिल है।
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रशीदनगर राधने वाली गली में रहने वाला शरीफ (38) पुत्र अब्दुल हमीद उर्फ मिद्दू मीट व्यापार के साथ ही प्रापर्टी डीलिंग का काम करता था। सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे वह अपने परिचित होमगार्ड अफजाल निवासी दमगढ़ी थाना सरूरपुर के साथ नूरनगर पुलिया के पास स्थित प्लाट पर बाउंड्री कराने गया था। वहां से लौटते वक्त लिसाड़ी रोड पर डाक्टर अलीम की दुकान के सामने एक बाइक पर सवार चार बदमाशों ने उन्हें घेरकर गोलियां बरसा दीं। बाइक को अफजाल चला रहा था, जबकि शरीफ पीछे बैठे थे। गोलियां चलते ही दोनों बाइक समेत गिर गए। जमीन पर गिरे शरीफ पर ही बदमाशों ने चार गोलियां दागीं। एक सिर में लगी और तीन पेट में। अफजाल की दाहिनी टांग में गोली लगी। वहीं थ्री व्हीलर का इंतजार कर रहे बागपत गेट स्थित चिश्ती पहलवान वाली गली निवासी आसिफ पुत्र शेरदीन के कूल्हे पर गोली लगी। वारदात कर बदमाश बाइक से फरार हो गए। मौके पर लोगों का हुजूम लग गया। लिसाड़ी गेट, ब्रह्मपुरी, परतापुर, टीपीनगर और कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। सीओ ब्रह्मपुरी, सीओ कोतवाली, सीओ कैंट, एसपी सिटी और एसएसपी ओंकार सिंह मौके पर पहुंचे। दोनों घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मीट व्यापारी के भाई मोबीन ने ब्रह्मपुरी थाने पर जावेद पुत्र चांद निवासी श्यामनगर, जीशान पुत्र इरफान, उमर और उमरदराज पुत्रगण यासीन निवासी मोहल्ला बनी सराय थाना कोतवाली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। नामजद जीशान मृतक शरीफ का सगा साला है। पुलिस को मौके से पांच खोखे बरामद हुए हैं, जिनमें दो .9 एमएम और बाकी 315 बोर के हैं।
2006 में हुई थी भाई की हत्या
शरीफ के भाई नफीस की 2006 में कमेला रोड पर हत्या कर दी गई थी। नफीस की हत्या की वजह कमेले में पशुओं के कटान को लेकर प्रतिस्पर्धा थी। तब तक शरीफ का परिवार मोहल्ला बनी सराय कोतवाली में रहता था। शरीफ की ससुराल भी बनी सराय में ही है। नफीस की हत्या में अनीसू पंडित, जीशान, उमर और उमरदराज नामजद किए गए थे। उसी रंजिश के चलते अब शरीफ को मौत के घाट उतार दिया गया।
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बचाओ-बचाओ चिल्लाया, पर कोई सामने न आया
तमंचे और पिस्टल लहराते हुए बदमाशों ने बेखौफ होकर की वारदात
शरीफ की लाइसेंसी पिस्टल भी लूटकर ले गए
मेरठ। दोपहर के करीब डेढ़ बजे थे। लिसाड़ी रोड पर खासी चहल पहल थी। भीड़ इतनी कि दुपहिया वाहन तक आराम से न निकल पाए। शरीफ और अफजाल बाइक से आ रहे थे, तभी पैशन बाइक पर पीछे से आए से बदमाशों ने एकाएक गोलियों की बौछार कर दी।
बदमाशों के हाथ में तमंचे और पिस्टल थीं। शरीफ को गोलियां मारने के बाद अफजाल करीब 300 मीटर तक बचाओ-बचाओ चिल्लाता हुआ भागा, तो बदमाश गोलियां बरसाते हुए उसके पीछे भागे। अफजाल के साथ ही आसिफ को भी गोली लगी। ढलाई वाली गली के पास अफजाल को गोली लगते ही भीड़ इकट्ठा हो गई। इसके बाद बदमाशों ने एक राहगीर की बाइक छीनने की कोशिश की, मगर कामयाब नहीं हुए। सरेआम हत्या से भगदड़ मच गई। डरे सहमे दुकानदारों ने धड़ाधड़ शटर बंद कर दिए। कोई भी बदमाशों का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। चार बदमाश एक ही बाइक पर आराम से लिसाड़ी रोड की तरफ फरार हो गए।
पहले जाटों वाली गली में घेर लिया था
बदमाशों ने पहले जाटों वाली गली में शरीफ और अफजाल को घेर लिया था, मगर वह दोनों बाइक लेकर भाग निकले। चारों बदमाशों ने पीछा करते हुए लिसाड़ी रोड पर दोनों को घेर लिया।
लाइसेंसी पिस्टल काम नहीं आया
पुरानी रंजिश के चलते शरीफ को जान का खतरा था। इसलिए उसने लाइसेंसी पिस्टल लिया था। सोमवार दोपहर भी शरीफ की अंटी में पिस्टल लगा था, लेकिन वह उसका इस्तेमाल न कर सका। मौके पर पहुंची पुलिस और परिजनों को पिस्टल नहीं मिला। जाहिर है कि हत्या करके बदमाश पिस्टल भी लूटकर ले गए।
सिटी मजिस्ट्रेट के यहां तैनात रहा होमगार्ड
अफजाल को लेकर कई चर्चा रहीं। कुछ लोग कह रहे थे कि अफजाल सिपाही है और शरीफ के साथ सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात था। कुछ कहने लगे कि अफजाल सिटी मजिस्ट्रेट का ड्राइवर है। बाद में सीओ ब्रह्मपुरी ने सिटी मजिस्ट्रेट को कॉल करके स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि अफजाल होमगार्ड है और पूर्व में सिटी मजिस्ट्रेट के यहां तैनात था। शरीफ उसका दोस्त था।
पुराने मामले में हो चुका था समझौता
सात साल पहले जब नफीस की हत्या हुई थी, तो उसके छह महीने बाद ही विरोधी पक्ष से अनीसू पंडित के भाई रहीसुद्दीन की हत्या हो गई थी। अनीसू पंडित कोतवाली थाना क्षेत्र के बनी सराय का रहने वाला है और कई आपराधिक मामलों में आरोपी है। रहीसुद्दीन हत्याकांड में शरीफ के खिलाफ भी रिपोर्ट हुई थी। इसके बाद ही शरीफ के परिजन बनी सराय मोहल्ले से अपनी संपत्ति बेचकर लिसाड़ी रोड पर भुमिया पुल के पास स्थित राधने वाली गली में जाकर बस गए थे। बाद में नफीस और रहीसुद्दीन हत्याकांड को लेकर दोनों पक्षों में समझौता हो गया था।
परिवार में मचा कोहराम
शरीफ के छह बच्चे हैं, जिनमें चार बेटियां और दो बेटे हैं। सबसे बड़ी बेटी 17 साल की है। चार भाईयों में से नफीस और शरीफ की हत्या हो चुकी है, अब मोबीन और शफीक हैं। शरीफ की पत्नी शाहीन और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। उधर, लोगों के गुस्से को देखते हुए शरीफ के शव का पोस्टमार्टम रात में ही कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से अनुमति ले ली गई।
छावनी बना लिसाड़ी रोड
हत्याकांड के बाद लिसाड़ी रोड पर हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गई। आसपास के कई थानों की पुलिस के साथ पीएसी भी बुला ली गई। हंगामे की आशंका को देखते हुए पुलिस बार-बार भीड़ को हटाती रही। इसके बावजूद रात तक भीड़ जमा रही। कुछ लोगों ने हंगामा प्रदर्शन कर जाम लगाने की कोशिश की, मगर जिम्मेदार लोगों ने समझाकर शांत कर दिया।
सीमा विवाद में उलझी पुलिस
ब्रह्मपुरी और लिसाड़ी गेट थाना पुलिस के बीच सीमा विवाद भी हुआ। जाटों वाली गली लिसाड़ी गेट थाने में आती है। हत्या लिसाड़ी रोड पर दाहिनी तरफ हुई, जो ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में आता है। सबसे पहले लिसाड़ी गेट एसओ पुलिस बल लेकर आए, उसके बाद ब्रह्मपुरी पुलिस पहुंची।
दबिश दी, पर हाथ नहीं आए आरोपी
ब्रह्मपुरी पुलिस ने आरोपियों की तलाश में श्यामनगर और बनी सराय में दबिश दी, मगर कोई भी हाथ नहीं लगा। आरोपी घरों से फरार मिले। सीओ विजय प्रताप यादव ने बताया कि देर रात तक दबिश डाली गई।
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